पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने एमबीबीएस की सीटें घटाने के मामले में सरकार को आड़े हाथों लिया हैं। धूमल ने कहा कि राज्य सरकार और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह प्रदेश की जनता को जवाब दें कि किसकी लापरवाही से राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की एमबीबीएस सीटें कम हो रही हैं।
शिमला में मीडिया से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार का पिछला डेढ़ साल बदला-बदली में ही बीत गया। इसका असर राज्य के विकास और स्वास्थ्य की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी और टांडा में एमसीआई ने एमबीबीएस सीटें घटाने की सिफारिश की है।
वर्ष 1998 में जाते-जाते कांग्रेस सरकार ने बिना आधारभूत ढांचे और एमसीआई मंजूरी के टांडा मेडिकल कालेज खोला था। भाजपा ने सरकार बनते ही इसे एमसीआई से मान्यता दिलाई और आवश्यक आधारभूत ढांचा विकसित किया।
भाजपा ने बढ़ाई, कांग्रेस ने घटाई
2008 से 2012 के बीच भाजपा ने आईजीएमसी में 65 से 100 की और टांडा में 50 से 100 सीटें करवाईं। दोनों कॉलेजों में दो-दो बार एमसीआई का निरीक्षण हुआ और मान्यता मिल गई। लेकिन पिछले डेढ़ वर्ष में इस सरकार की कमजोरी के कारण अब आईजीएमसी में 65 और टांडा में 50 सीटें ही रह जाएंगी।
धूमल ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए काम के आधार पर प्रदेश को जब सम्मानित किया गया, तब कांग्रेस अपनी पीठ थपथपा रही थी और होर्र्डिंग्स लगाकर प्रचार कर रही थी। पुरस्कार लेने के लिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह स्वयं विधानसभा सत्र छोड़कर दिल्ली चले गए, जबकि स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह देखते रह गए कि पुरस्कार लेने तो उनका जाना बनता था।