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बलड़ा गांव; यहां कंधे, चारपाई पर बैठकर अस्पताल पहुंचते हैं मरीज

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ग्राम पंचायत सुन्हाणी के बलड़ा गांव के लोग खस्ताहाल सड़क मार्ग को दिखाते हुए। -संवाद
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झंडूता (बिलासपुर)। आजादी के 74 साल बाद भी प्रदेश के कई क्षेत्र हैं। जहां लोगों को सड़क और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। ऐसा ही एक गांव है बलड़ा। गांव के लिए सड़क तो है पर इसे पक्का नहीं किया गया। बरसात में सड़क तालाब बन जाती है। दलदल बनी सड़क में वाहनों की आवाजाही ठप हो जाती है। गांव में कोई बीमार हो जाए तो मरीज को कंधे या फिर चारपाई का सहारा मिलता है। मरीज को उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। कई बार सड़क की हालत सुधारने की मांग की गई। सुनने वाला कोई नहीं। इससे लोगों में रोष है। इन दिनों गांव की सड़क नाले में तबदील हो गई है। गांव के करीब दो दर्जन परिवार इससे परेशान हैं।
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ग्रामीणों कुलदीप सोनी, अनंत राम, जगरनाथ, राम सिंह, प्रकाश वर्मा, प्रेम सिंह, पंकज सोनी, सचिन सोनी, रिशु सोनी, बलदेव वर्मा, विक्की वर्मा, नितिन सहित अन्यों ने बताया कि बलड़ा सड़क की सुध न तो लोक निर्माण विभाग और न ही ग्राम पंचायत ले रहे हैं। बार-बार बहाना बना दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सड़क नाले में तबदील हो चुकी है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हैं। वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। गांव में यदि कोई बीमार हो जाता है तो उसे चारपाई या पीठ पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। लोगों को एंबुलेंस सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों ने बताया कि यदि सड़क की हालत शीघ्र नहीं सुधरी तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्राम पंचायत प्रधान उपेंद्र परमार ने कहा कि सड़क को पक्का करने के लिए मनरेगा में तीन लाख रुपये का प्रस्ताव डाला गया है। सीमेंट की सप्लाई आने पर सड़क को पक्का करने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
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