हिमालय रेंज के करीब नौ हजार से अधिक ग्लेशियरों के लिए दिसंबर की बर्फबारी संजीवनी का काम करेगी। पिछले चार दिन हुई बर्फबारी से ग्लेशियर न केवल टिकाऊ होंगे, बल्कि कुल्लू और लाहौल-स्पीति रेंज के ग्लेशियर के लगातार टूटने और पिघलने की गति को भी रोकेगी। हिमालय रेंज में चार से आठ फीट तक बर्फबारी हुई है। लगातार तापमान बढ़ने पर्यावरण और प्रदूषण से हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर ग्लोबल वार्मिंग के कारण पिघल रहे हैं।
जानकार बताते हैं कि दिसंबर और जनवरी में होने वाली बर्फबारी ग्लेशियरों को नया रूप देती है। तापमान बढ़ने और वायु प्रदूषण में हो रही वृद्धि से छोटे ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं। हर साल करीब 20 मीटर का दायरा घट रहा है। ग्लेशियर के शोधकर्ता एवं जलवायु परिवर्तन वरिष्ठ वैज्ञानिक जेसी कुनियाल का कहना है कि नई बर्फ की चादर जमने से ग्लेशियर पर्यावरण संतुलन को भी बेहतर करेंगे। दिसंबर की बर्फ ग्लेशियरों को ज्यादा टिकाऊ बनाती है।
इन ग्लेशियरों को मिली संजीवनी
कांगला ग्लेशियर, बड़ा शिगरी, छोटा शिगरी, श्रीखंड महादेव, थिहणी जोत, हंसकुंड, तीर्थन जोत, लांबा लांबारी, रघुपुर ग्लेशियर, हनुमान टिब्बा, चंद्रखणी तथा पिन पार्वती में मौजूद दर्जनों ग्लेशियरों को संजीवनी मिली है।
सर्दी में इंधन के रूप में लकड़ी जलाने तथा खुले में कूड़े-कचरे को जलाने के मामले बढ़ जाते हैं। इससे ग्लेशियरों पर अधिक दबाव पड़ता है। पर्यावरण को देखते हुए लोगों को सर्दी में चूल्हे की आग, तंदूर तथा खुले में कचरे को जलाना कम करने की जरूरत है।
- डॉ. जेसी कुनियाल वरिष्ठ वैज्ञानिक जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान अल्मोड़ा