सुबह करीब आठ बजे जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया। शहीद की माता, पत्नी और बेटियों का रो-रो कर बुरा हाल था। परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने उन्हें ढांढस बंधाया।
युद्धपोत विस्फोट में शहीद हुए उपमंडल बड़सर की सठवीं पंचायत निवासी सुरेंद्र ढटवालिया का शुक्रवार को उनके पैतृक गांव के श्मशानघाट में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद की दोनों बेटियों विशाखा और शगुन ने पार्थिव देह को मुखाग्नि दी। इस मौके पर शहीद अमर रहे के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। वहीं क्षेत्र के हजारों लोगों ने शहीद को अंतिम विदाई दी।
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इससे पूर्व शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया। शहीद की माता, पत्नी और बेटियों का रो-रो कर बुरा हाल था। परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने उन्हें ढांढस बंधाया। शहीद के अंतिम सफर में उनके साथ हजारों की संख्या में युवा और लोग भारत माता की जय और शहीद अमर रहे के नारे लगाते हुए चले।
10 बजे अंतिम संस्कार की रस्मों को पूरा करते हुए झोरघाट श्मशानघाट में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। नौसेना से आए अधिकारियों ने शहीद की पत्नी नीलम को राष्ट्रीय ध्वज और नौसेना की टोपी सौंपी। जिसे नीलम नम आंखों से कुछ देर तक निहारती रही। बीते मंगलवार को भारतीय नौ सेना में मुंबई आईएनएस रणवीर युद्धपोत पर तैनात वीर जांबाज कैप्टन सुरेंद्र सिंह युद्धपोत पर हुए धमाके में शहीद हो गए थे।
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जिला प्रशासन की तरफ से एडीएम जितेंद्र सांजटा, अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी, एसडीएम बड़सर शशिपाल, डीएसपी बड़सर शेर सिंह, एसएचओ बड़सर मस्तराम नाइक, बीडीओ बिझड़ी हरिराम, विधायक बड़सर इंद्रदत्त लखनपाल, पूर्व विधायक बलदेव शर्मा, कल्याण बोर्ड अध्यक्ष राकेश बबली सहित हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।