ओपीडी में उपचार के लिए आए दो मरीज टेस्ट के बाद निकले पॉजिटिव, लोगों में हड़कंप
क्रॉसर
कोटखाई और शिमला के रहने वाले है दोनों मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में स्क्रब टायफस के बाद अब डेंगू के मरीजों ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। अस्पताल में दो मरीजों के टेस्ट पॉजिटिव पाए गए हैं। आईजीएमसी के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राहुल गुप्ता ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दोनों मरीजों की हालत स्थिर है।
प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में डेंगू से पीड़ित मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। लक्षण दिखने के बाद चिकित्सक मरीजों के डेंगू टेस्ट करवा रहे हैं। इनमें जिला शिमला के कोटखाई के 42 और शिमला की 21 साल की लड़की इस बीमारी से पीड़ित पाई गई हैं। दोनों मरीजों की ट्रेवल हिस्ट्री बाहर की है। चिकित्सकों का कहना है कि बार्डर एरिया में बिलासपुर, चंडीगढ़ और दिल्ली गए लोग ही इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
एडीज मच्छर के काटने से होता है डेंगू
डॉक्टरों का कहना है कि एडीज नामक मच्छर की प्रजाति के काटने से यह बीमारी होती है। इस मच्छर के काटने पर विषाणु तेजी से मरीज के शरीर में असर दिखाते हैं। इस कारण तेज बुखार और सिरदर्द होती है। इसे हड्डी तोड़ बुखार या ब्रेक बोन बुखार भी कहा जाता है। डेंगू होने पर मरीज के खून में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटती है। इससे कई बार जान जोखिम में पड़ जाती है। इन दिनों आईजीएमसी की मेडिसिन ओपीडी में तेज सिरदर्द संबधित बीमारियों की ओपीडी लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर अब तक आईजीएमसी में 353 लोग स्क्रब टायफस पॉजिटिव आ चुके हैं।
डेंगू के मामले अधिकतर बरसात में आते हैं। डेंगू फैलाने वाले मच्छर दिन में काटते हैं। यह मच्छर ठहरे हुए पानी में पनपते हैं। डेंगू कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को आसानी से होता है।
डेंगू की पहचान और लक्षण
डेंगू के लक्षण तीन से चौदह दिन बाद दिखते हैं। इसमें तेज ठंड और बुखार होता है। वहीं सिर और आंखों में भी दर्द हो जाता है। इसके अलावा शरीर और जोड़ों में दर्द में रहता है। चमड़ी के नीचे लाल धब्बे होना और जी मिचलाना, उल्टी तथा दस्त होना इसके लक्षण हैं। इस बीमारी के होने पर भूख भी कम होने लगती है। स्थिति गंभीर होने पर आंखों और नाक से खून आ जाता है। इससे व्यक्ति शॉक में चला जाता है, डेंगू शॉक भी कहा जाता है। हालांकि तब होगा जब प्लेटलेट्स दस हजार से कम हो जाएगा।
पहाड़ों में नहीं होता डेंगू
वाला मच्छर : डॉ. उष्येंद्र
आईजीएमसी के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उष्येंद्र शर्मा ने कहा कि शिमला में डेंगू फैलने के चांस काफी कम हैं। अस्पताल में इलाज के लिए आ रहे लोग दूसरे राज्यों से घूमकर आए हैं। कहा कि डेंगू मच्छर चार से पांच हजार फीट की ऊंचाई में नहीं होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। पानी की कमी भी शरीर में नहीं होनी चाहिए।