16 अप्रैल को अष्टमी और 17 अप्रैल को मनाई जाएगी रामनवमी
दोनों तिथियों को श्रद्धालु कर सकते हैं व्रत का पारण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नवरात्र में महाअष्टमी और महानवमी पर कन्या पूजन करने से दुखों और कष्टों से मुक्ति मिलती है। कन्याओं को माता दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। शास्त्रों में कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। कन्या पूजन करने से घर में माता लक्ष्मी का वास बना रहता है।
नवरात्र में अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन किया जाएगा। चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 15 अप्रैल दोपहर 12:12 बजे शुरू होगी। 16 अप्रैल दोपहर 01: 25 बजे तक अष्टमी तिथि रहेगी। राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि ज्योतिष के अनुसार नवरात्र की अष्टमी तिथि का व्रत 16 अप्रैल को किया जाएगा। उन्होंने बताया कि चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 16 अप्रैल दोपहर 01:25 बजे शुरू होगी और 17 अप्रैल दोपहर 03:15 बजे तक रहेगी। ऐसे में नवमी 17 अप्रैल बुधवार को मनाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में नवरात्र की अवधि में नौ दिनों तक माता दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। बताया कि इस पावन अवधि में आदिशक्ति के नौ रूपों की आराधना करने से साधक के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं। कई लोग नवरात्र व्रत का समापन अष्टमी तिथि पर करते हैं तो कई नवमी तिथि पर अपना व्रत खोलते हैं।
महाअष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन करने से माता दुर्गा प्रसन्न होती हैं।