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रशियन बाबा का ये राज नहीं जानना चाहेंगे

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धर्मकोट से आठ किलोमीटर दूर करीब 2700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित त्रियुंड के पास गुफा बनाकर रह रहे रहस्यमयी रशियन साधु तिशिन दमित्री ने खुलासा किया है कि वह जादू-टोने से लोगों का इलाज करता था। तिब्बती मूल के लोग उसके ज्यादा भक्त थे। पुलिस जांच में बताया कि तिब्बती उसे अपना गुरु मानने लगे थे।
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इसके अलावा विदेशी पर्यटकों को मन शांत रखने के उपाय बताता था। बाबा की झोंपड़ी एकांत में होने से विदेशियों का आना-जाना यहां लगा रहता था। विदेशी इलाज करवाने पर बाबा को विदेशी मुद्रा देते थे। बाबा इसे एक्सचेंज करवाकर अपना खर्चा चलाता था।

मैकलोडगंज में रह रहे तिब्बती बाबा को खाने-पीने की चीजों के अलावा भारतीय मुद्रा देते थे। ट्रैकिंग पर जाने वाले कई पर्यटक यहां रुकते थे। विदेशी पर्यटकों के बीच साधु की काफी पैठ बन गई थी। उधर, एएसपी डा. शिव कुमार ने कहा कि पुलिस गहनता से मामले की छानबीन कर रही है।
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अब क्या होगा बाबा के साथ

विदेशी बाबा को कोर्ट में पेश किया जाएगा। यहां से उसे ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा जा सकता है। अब साधु को उसके देश भेजने के लिए दिल्ली स्थित रूस के दूतावास से भी संपर्क किया गया है। इस कार्रवाई में दो माह लग सकते हैं। तब तक उसे पुलिस हिरासत में रहना पड़ सकता है।

सवाल और साधु के जवाब (सूत्रों के हवाले से)
सवाल: बाबा आपको अपने देश में भेजने की कार्रवाई शुरू हो गई है।
साधु: आप जो कार्रवाई करना चाहते हैं, उसे करो। मैं फिर वीजा लेकर अपनी झोंपड़ी में ही रहूंगा।
सवाल: ऐसा क्या है झोपड़ी में
जवाब: झोपड़ी में एकांत है। एकांत में यहां रहना मैं बहुत पसंद करता हूं।
सवाल: आप अपने देश में क्यों रहना पसंद नहीं करते हो?
जवाब: त्रियुंड के पास गाहर की कूहल वाली जगह मेरे मन में बस गई है। यहां की एकांत वादियां मुझे अपनी ओर आकर्षित करती हैं। इस जगह को मैं कदापि नहीं छोड़ूंगा।
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