हिमाचल प्रदेश सूचना आयोग ने आरटीआई एक्ट के तहत देरी से सूचना देने पर ग्राम पंचायत जोल के सचिव और ग्राम पंचायत देरा के सचिव कुलदीप चंद को 10 हजार रुपये की पेनल्टी लगाई है।
आयोग ने यह पेनल्टी दोनों को बराबर-बराबर हिस्सों में देने के आदेश दिए हैं। राज्य मुख्य सूचना आयुक्त भीम सेन ने यह आदेश बख्शी राम बनाम पीआईओ ग्राम पंचायत जोल तहसील सुजानपुर मामले में सुनाया है।
राज्य सूचना आयोग ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम अपीलेट अथॉरिटी ने दोनों पंचायत सचिवों को इसके लिए जिम्मेवार माना है। दोनों सचिवों की ओर से ऐसे कोई कारण नहीं बताए गए हैं, जिससे कि प्रथम अपीलेट अथॉरिटी की इस बात को नहीं माना जाए।
आरटीआई की दरख्वास्त को आरटीआई एक्ट के प्रावधानों के अनुसार 20 जुलाई 2013 को डिस्पोज ऑफ किया जाना था। यह प्रावधान एक्ट की धारा 7 में है। पर इसे 30 अगस्त 2013 को डिस्पोज ऑफ किया गया।
इस तरह से 40 दिन की देरी हुई है। ग्राम पंचायत देरा के सचिव के पास ग्राम पंचायत जोल के सचिव का भी कार्यभार रहा है। इसलिए दोनों की जिम्मेवारी तय हुई। तत्कालीन सचिव कुलदीप चंद के अनुसार यह दरख्वास्त उन्होंने रिसीव नहीं की, पर उन्होंने यह सूचना टेलीफोन के निर्देशों के अनुसार तय की।
उन्होंने अपीलकर्ता को पोस्टल चार्जेस के साथ अतिरिक्त शुल्क देने को लिखा। पंचायत सचिव की ओर से लिखे गए पत्र के अनुसार यह पाया गया है कि आरटीआई दरख्वास्त के नहीं लेने और पंचायत इंस्पेक्टर के टेलीफोन से मैसेज का पत्र में कोई उल्लेख नहीं किया गया।
इसलिए उनका मौखिक तौर पर यह कहना कि आरटीआई की दरख्वास्त नहीं ली, इसे नहीं माना जा सकता है। सचिव संसार चंद की दलील थी कि वह प्रशिक्षण पर थे। जब वापस आए तो उन्होंने कोई आरटीआई दरख्वास्त लंबित नजर नहीं आई। उन्होंने कहा के प्रथम अपीलेट अथॉरिटी के आदेशों के अनुरूप सूचना दे दी गई।