कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की राज्य कमेटी ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत पर विधायिका को दरकिनार कर समानांतर सरकार चलाने का आरोप लगाया है। पार्टी के राज्य सचिव डा. ओंकार शाद ने कहा राज्यपाल कैबिनेट को भी दरकिनार कर रहे हैं। यह संविधान की प्रस्तावना का उल्लंघन है। वे अपनी नियुक्ति के समय से मंत्रियों, अधिकारियों को अपने पास बैठक के लिए बुला रहे हैं।
बैठकों में राज्य से जुड़े मुद्दों पर निर्णय लेकर जनता की ओर से चुनी हुई सरकार और स्थानीय निकायों को दरकिनार कर रहे हैं। इससे लगता है कि राज्यपाल एक विशेष विचारधारा के तहत केंद्र सरकार के एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं। सीपीआई (एम) भारत के संविधान की पालना को हमेशा कटिबद्ध रही है। कहा कि राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं।
लेकिन संविधान के दिशा-निर्देशों के अनुरूप उन्हें राज्य कैबिनेट की सलाह पर कार्य करना है। राज्य कैबिनेट के निर्णयों पर अगर उन्हें आपत्ति है तो उसे दोबारा विचार के लिए भेज सकते हैं, लेकिन वे अपनी नियुक्ति के बाद से ही इस प्रक्रिया को लागू न कर मनमाने तरीके से प्रदेश के प्रशासन को चलाना चाह रहे हैं।
कुछ दिन पहले सिरमौर के सराहां क्षेत्र में पशु तस्करी के नाम पर एक विशेष विचारधारा के तहत एक धर्म के खिलाफ अभियान चलाकर एक नवयुवक की हत्या कर दी गई। हमारे देश का संविधान धर्म निरपेक्षता को मान्यता देता है। चूंकि, ऐसी घटना प्रदेश में पहली बार हुई। इस घटना को एक-दूसरे धर्म के खिलाफ जोड़कर देखा गया।
राज्यपाल ने संवैधानिक प्रमुख पद पर होते हुए अभी तक न तो इस घटना की निंदा की और न ही ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने की बात कही। इससे साफ है कि वे किसी विशेष विचारधारा को बढ़ावा देना चाहते हैं। सीपीआई (एम) राज्य कमेटी अपील करती है कि प्रदेश के राज्यपाल संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत काम करें, अन्यथा पार्टी राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें हटाने की मांग करेगी।