शिमला शहर के नाम पर यूरोपियन यूनियन से नगर निगम को मिल रहे करोड़ों रुपये का जमकर दुरुपयोग हो रहा है। कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए मिलने वाला पैसा सैर सपाटे और खाने पीने पर खर्च किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट के पैसे से मेयर संजय चौहान अपनी चापलूसी करने वाले पार्षदों को पिकनिक करवा रहे हैं। शिमला के विधायक सुरेश भारद्वाज ने यूरोपियन यूनियन के प्रोजेक्ट को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विधायक ने निगम आयुक्त पंकज राय को यूरोपियन यूनियन से शिमला शहर के नाम पर मिल रहे पैसों का दुरुपयोग रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की नसीहत दी है। विधायक ने दो टूक कहा है कि प्रोजेक्ट के तहत की जा रही मनमानी का मुद्दा वह विधानसभा में उठाएंगे।
विधायक का कहना है कि यह पूरा प्रोजेक्ट शिमला शहर के नाम पर चल रहा है, इसलिए शहर के लोगों को यह जानने का हक है कि प्रोजेक्ट के तहत किए जा रहे टूअरों में क्या सीखा जा रहा है? शहर को इससे क्या फायदा होने वाला है।
लेकिन नगर निगम न तो टूअर की कोई रिपोर्ट तैयार कर रहा है और न ही निगम के हाउस में इसे लेकर कोई चर्चा हो रही है। इतना ही नहीं कायदे कानूनों को ताक पर रखकर प्रोजेक्ट में कर्मचारियों की तैनाती की है।
विधायक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि यूरोपियन यूनियन प्रोजेक्ट के तहत करवाए जा रहे टूअर की न तो कई रिपोर्ट बन रही है और न ही हाउस में इसे लेकर चर्चा की जा रही है। शिमला शहर के नाम पर यह प्रोजेक्ट मिला है इसलिए शहर के लोगों को यह जानने का पूरा हक है कि प्रोजेक्ट का पैसा कहां और कैसे खर्च किया जा रहा है।
12 अक्तूबर को शिमला से नगर निगम का दल मुंबई रवाना हुआ था। डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर के अलावा नगर निगम के 9 पार्षद और तीन अधिकारी दल में शामिल थे। भाजपा पार्षदों को भी टूअर में ले जाया गया था। मुंबई के अलावा पूना और शोलापुर का भी दौरा किया। शोलापुर में दल ने कचरे से बिजली के उत्पादन करने वाला प्लांट देखा।
एमसी को यूरोपियन यूनियन के तहत चल रहे प्रोजेक्ट के तहत पहली किस्त के रूप में करीब सवा करोड़ रुपये मिल चुके हैं। नगर निगम को यह राशि करीब ढाई साल पहले मिल चुकी है। एमसी अब यूरोपियन यूनियन से दूसरी किस्त की मांग कर रहा है। प्रोजेक्ट से नगर निगम एक हनीसक्कर खरीद चुका है, बाकी प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है।