प्रदेश में फोरलेन निर्माण के दौरान कंपनियां एमओयू की शर्तों की धज्जियां उड़ा रही हैं। पहाड़ों में तीस फुट से अधिक ऊंचाई तक कटिंग की जा रही है। इससे पहाड़ दरकने लगे हैं। फोरलेन किनारे कटिंग के बाद जो डंगे लगाए जा रहे हैं, वे भी मलबे के साथ ध्वस्त हो रहे हैं। फोरलेन निर्माण में गुणवत्ता भी दांव पर लग रही है। राज्य में फोरलेन निर्माण से जुड़ी कंपनियों से समझौता ज्ञापन की शर्तों के अनुसार पहाड़ों में तीस फुट से अधिक कटिंग नहीं की जा सकती।
ये कंपनियां फोरलेन निर्माण के दौरान कई स्थानों में पहाड़ों की कटिंग नब्बे फुट तक कर चुकी हैं। इसके बाद पहाड़ कच्चे होने के कारण दरककर गिरने लगे हैं। यह समस्य कई बार सामने आ चुकी है। अगर तीस फुट से अधिक पहाड़ की कटिंग हो रही है तो तीस फुट ऊंची आरसीसी की दीवार खड़ी करने फिर दूसरी दीवार खड़ी करनी अनिवार्य है। यह शर्त इसलिए लगाई गई है, ताकि पहाड़ों की कटिंग के बाद पहाड़ी न गिरे। पहाड़ों का लूज स्ट्राटा होने के बाद भी गलत तरीके से कटिंग करके लोगों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
सड़कों को चौड़ा करते वक्त गुणवत्ता का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा। प्रदेश योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश धवाला ने कहा कि फोरलेन निर्माण को लेकर समझौता कंपनियों से किया जा रहा है, लेकिन वे एमओयू की शर्तों का उल्लंघन कर रही हैं। पहाड़ों में अधिक ऊंचाई तक कटिंग की जा रही है। इससे पहाड़ों के दरकने की समस्या खड़ी हो गई है। पहाड़ों की कटिंग के बाद जो दीवारें तीस फुट ऊंची लगनी चाहिए थीं, वे नब्बे फुट ऊंची लगाई जा रही हैं। पहाड़ों के साथ दीवारें भी ढहने लगी हैं। निर्माण के दौरान गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा। यह मामला मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी उठाया जा चुका है।