जेनेरिक दवाइयां न लिखने पर 400 डॉक्टरों को विभागाध्यक्षों ने तलब किया है। स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार के कड़ा रुख अपनाने के बाद अब इन पर कार्रवाई की जा रही है। सरकार को निजी दवा कंपनियों के साथ सांठगांठ की भी आशंका है।
सरकार ने अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे मरीजों की पर्ची में जेनेरिक दवाइयां ही लिखें। डॉक्टर उन दवाइयों को लिख रहे हैं, जो जेनेरिक केंद्रों में नहीं मिल रही हैं। मजबूरन, मरीजों में दुकानों से मंहगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
सरकार ने जिलों के अस्पतालों के प्रांगण में जेनेरिक दवा केंद्र खोल रखे हैं। इनमें मरीजों को निशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। जो दवाइयां केंद्रों में नहीं हैं, उन्हें ही मरीजों को दुकानों से खरीदने को कहा जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि इन डॉक्टरों को नोटिस जारी किए गए हैं। कार्रवाई करने से पहले इन्हें अपना पक्ष रखने को कहा है। अस्पतालों में मरीजों को निशुल्क दवाइयां दी जा रही हैं, लेकिन मरीजों से भी इस मामले में सहयोग करने की अपील की है।