डीजल इंजन से उत्सर्जित कालिख का उपयोग पानी से तेल और अन्य जैव रसायन प्रदूषक सोखने के लिए होगा। यह प्रयोग पर्यावरण विज्ञान एवं प्रदूषण शोध जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
अमर उजाला से बातचीत में आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राहुल वैश ने बताया कि शोध छात्र विश्वेंद्र प्रताप सिंह एवं मूलचंद शर्मा ने इस प्रोजेक्ट में मदद की है।
आइडिया उन्होंने मोमबत्ती से निकलने वाली कालिख से लिया। कार्बन स्पीसीज जैसे कार्बन नैनोट्यूब्स, ग्रेफीन या मोमबत्ती की कालिख ने कई क्षेत्रों में इस संभावना का प्रदर्शन किया है।
ऑटोमोबाइल से निकलने वाले कार्बन स्पीसीज पानी में मौजूद विभिन्न जैव प्रदूषक तत्वों को सोख लेते हैं। इसलिए कार्बन मोनोट्यूब्स, फिल्टर पेपर, मेश फिल्म्स और ग्रैफीन का इस्तेमाल पानी से तेल अलग करने में होता है।
पिछले दो दशकों में तेल के टैंकरों या जहाजों और औद्योगिक दुघर्टनाओं की वजह से तेल एवं रसायनों के रिसने की घटनाएं अधिक होने लगी हैं। दावा है कि नए मैटीरियल्स पानी से तेल अलग कर लेने और पर्यावरण को इस हादसे से बचाने में काम आएंगे।
डॉ. वैश ने बताया कि पानी के प्रदूषण की वजह तेल, जैव प्रदूषकों के रिसाव के अलावा डाई और डिटर्जेंट जैसे प्रदूषक भी हैं जो उद्योगों और लोगों के घरों से निकल कर पानी में मिल जाते हैं। ऐसे में कालिख युक्त स्पंज से सामान्य घरेलू और औद्योगिक कचरों को कम लागत पर प्रदूषक तत्वों से मुक्त कर सकते हैं।