इस नस्ल की अपनी कई खूबियां हैं, जिनके कारण यह स्पीति और किन्नौर के शून्य से कम तापमान, ऊंचाई और दुर्गम क्षेत्रों में भी सुगमता से अपना कार्य करता है। यह एक श्योर फूटेड पशु है, यानि के जहां पांव रख दिया वहां से वह हिलता नहीं। जिसका श्रेय इसके पांव या खुर की बनावट को जाता है। इसके इलावा इस के फेफड़ों की क्षमता और खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा भी अधिक है।
इसके चलते यह अति ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जहां ऑक्सीजन की मात्रा बहुत ही कम है, वहां भी अपना कार्य आसानी से करता है। इसकी टांगों के लंबाई कम होती है, जिसके कारण यह अपना संतुलन पहाड़ी क्षेत्रों में बनाए रखता है। इन्हीं गुणों के कारण भारत तिब्बत बॉर्डर पुलिस फोर्स द्वारा इनका इस्तेमाल सीमा के अति दुर्गम क्षेत्रों में सामान की ढुलाई के लिए भी किया जाता है।
स्पीति के लरी में चल रहा अश्व प्रजनन केंद्र
प्रदेश के पशुपालन विभाग ने इस नस्ल के बचाव के लिए स्पीति के लरी में अश्व प्रजनन केंद्र चलाया जा है। यहां शुद्ध स्पीति घोड़ों का प्रजनन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय लवी मेले के प्रारंभ होने से पूर्व रामपुर बुशहर में अश्व प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाता है, जिसकी वर्षों से चामुर्थी शान और आकर्षण का केंद बना हुआ है।
पशुपालन विभाग ज्यूरी के डॉ. गुलशन ने कहा कि चामुर्थी घोड़े पशुपालन विभाग की भी शान है। इसकी नस्ल को बचाने के लिए विभाग स्पीति के लरी प्रजनन केंद्र बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।