मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शीर्ष अधिकारियों के साथ 21 अगस्त, 2018 की बैठक में यह मामला जांच के लिए सीबीआई को भेजने का फैसला लिया था। तबसे लेकर इस बारे में केंद्रीय कार्मिक विभाग और सीबीआई से हिमाचल सरकार का कई बार पत्राचार हुआ। सीबीआई के दिशा-निर्देश पर हिमाचल सरकार ने इसके बारे में छोटा शिमला थाने में भी एफआईआर दर्ज की है।
आरोप है कि कई निजी संस्थानों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर छात्रवृत्ति की मोटी रकम हड़प ली। शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2013-14 से 2016-17 तक स्कॉलरशिप में बड़े स्तर पर गड़बड़ी के आरोप हैं। जमा एक और जमा दो कक्षाओं के अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति में 250 करोड़ रुपये से अधिक की रकम का गलत आवंटन हुआ। इस मामले की जांच की जद में दो दर्जन निजी उच्च शिक्षण संस्थान आए हैं।