ब्रेड, बिस्किट और पानी ही यूक्रेन के खार्किव में फंसे लोगों का सहारा बचा है। यूक्रेन प्रशासन ने अब खाने के लिए मदद भी कम कर दी है। इससे खार्किव के बंकरों में फंसे 1100 लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। बंकरों में भारतीय, पाकिस्तानी और अन्य देशों के लोग फंसे हैं। लोगों के पास बस के जरिये ही खार्किव से निकलने का रास्ता है, लेकिन लोग आसमान से बरस रहे मौत के गोलों में बंकरों से भी बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। बमबारी से दूरसंचार, यातायात, एटीएम, बिजली सहित अन्य सुविधाएं ठप हैं। मेसेज के जरिये बंकरों में महफूज लोग रिश्तेदारों को वहां के हालात की जानकारी दे रहे हैं।
नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी खार्किव में मेडिकल की पांचवें सत्र की प्रशिक्षु कृति धीमान ने अपने पिता संजय को व्हाट्सएप पर यह मेसेज भेजा है। परिजनों ने केंद्र और प्रदेश सरकार से मांग की है कि जल्द यूक्रेन में फंसे बच्चों को भारत लाया जाए। संजय ने बताया कि शनिवार को भी उन्होंने जिला प्रशासन, सरकार के हेल्पलाइन नंबर 1100 पर संपर्क कर यूक्रेन के खार्किव शहर के पूर्व में फंसी बेटी सहित अन्य लोगों को जल्द लाने की गुहार लगाई है। उपायुक्त चंबा डीसी राणा ने कहा कि यूक्रेन में हालात खराब हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार वहां फंसे बच्चों को निकालने के लिए प्रयासरत है।