अभय को कराटे के लिए उसके दादा जगदीश राम से प्रेरणा मिली। दादा हर दिन उसे कोच के पास प्रैक्टिस करवाने ले जाते हैं। सेना से सेवानिवृत्त अभय के दादा ने अभय को आत्मरक्षा और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कराटे की ट्रेनिंग दिलवाई।
महज नौ वर्ष की उम्र में हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के गगरेट में बनेहड़ा के अभय ने कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल की है। गोंदपुर बनेहड़ा के अभय ने जुनून से यह उपलब्धि हासिल की है। अभय ने इसका श्रेय कोच प्रेम को दिया है। अभय के पिता रविंद्र डडवाल निजी उद्योग में कार्यरत हैं। माता गृहिणी हैं। अभय को कराटे के लिए उसके दादा जगदीश राम से प्रेरणा मिली। दादा हर दिन उसे कोच के पास प्रैक्टिस करवाने ले जाते हैं।
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सेना से सेवानिवृत्त अभय के दादा ने अभय को आत्मरक्षा और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कराटे की ट्रेनिंग दिलवाई। अभय ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी नाम रोशन किया है। पिछले दिनों बटाला और पठानकोट में हुई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अभय ने दूसरा स्थान हासिल किया था। मात्र आठ माह की कड़ी मेहनत से अभय ने ब्लैक बेल्ट तक का सफर तय कर लिया है। जिला वाड़ू रमु एसोसिएशन ने गगरेट के नकडोह गांव में कार्यक्रम के दौरान अभय को ब्लैक बेल्ट देकर सम्मानित किया।