सीआरपीएफ में सिपाही बुद्धि सिंह को दो पुलिस पदक
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हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के कोट गांव निवासी सीआरपीएफ में सिपाही बुद्धि सिंह को वीरता के लिए एकसाथ दो पुलिस पदकों से नवाजा गया है। सीआरपीएफ के ऑफिसर ट्रेनिंग सेंटर गुरुग्राम (हरियाणा) में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने उन्हें 19 मार्च 2021 को सम्मानित किया। दो अलग-अलग ऑपरेशन में पांच आतंकवादियों को ढेर करने के लिए बुद्धि सिंह को यह सम्मान दिया गया है। इससे पहले भी उन्हें 19 मार्च 2019 को एक पदक मिल चुका है। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने उन्हें सम्मानित किया था।
बिलासपुर के इस जांबाज सिपाही को तीसरी बार पुलिस पदक से नवाजा गया है। सिपाही बुद्धि सिंह वर्ष 2016 से 2019 तक श्रीनगर में सीआरपीएफ की वैली क्यूएटी टीम का 3 साल तक हिस्सा रहे। इसका काम घाटी से आतंकवादियों का सफाया करना है। बुद्धि सिंह का टीम में मुख्य काम हाउस इंटरवेंशन करना था। टीम के साथ मिलकर लगभग 25 से ज्यादा सफल ऑपरेशनों को अंजाम दिया गया। टीम ने 50 से अधिक आतंकवादियों का सफाया किया। बुद्धि सिंह हाउस इंटरवेंशन टीम के अहम सदस्य रहे। इनका मुख्य काम था घर में छिपे आतंकवादियों को अंदर घुसकर मारना। सिपाही बुद्धि को वीरता पुलिस पदक, डीजी डिस्क व प्रशंसा पत्र, जेएंडके डीजी मेडल और एनआईएडीजी प्रशंसा पत्र मिल चुका है।
कारगिल युद्ध पर बनी फिल्म से पैदा हुए देशसेवा का जज्बा
बिलासपुर जिले के झंडूता विधानसभा क्षेत्र के कोट निवासी बुद्धि सिंह 2004 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। इन्होंने अपनी 16 वर्ष की नौकरी में अधिकतर सेवाएं नक्सलवाद और आतंकवाद से ग्रस्त क्षेत्र में दी हैं। बुद्धि सिंह कहते हैं कि उनका सेना में जाने का विचार नहीं था, लेकिन 1999 में कारगिल युद्ध पर बनी बॉलीवुड फिल्म एलओसी कारगिल ने उनके दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी। कारगिल युद्ध के हीरो संजय कुमार की तरह अपने देश और प्रदेश का नाम रोशन करने की ठान कर सीआरपीएफ में भर्ती हुए। इसके बाद 2016 में श्रीनगर में सीआरपीएफ की स्पेशल ऑपरेशनल टीम में अपनी इच्छा से शामिल हुए।