इसके बाद मंदिर प्रबंधन ने मंडलायुक्त के पास स्टे के लिए याचिका दाखिल कर दी। इस पर मंगलवार को स्टे के आदेश पारित हो गए हैं। उधर, मंदिर प्रंबधन के अधिवक्ता सुधीर ठाकुर ने स्टे मिलने की पुष्टि की है।
तहसीलदार कंडाघाट ने अपने फैसले में कहा था कि मंदिर का निर्माण राजस्व विभाग की पांच बीघा 6 बिस्वा जमीन पर हुआ है। अतिक्रमण करने पर मंदिर प्रबंधन पर 1.06 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया था। उस समय तहसीलदार ओपी मेहता ने फैसला दिया था कि चूंकि राम मंदिर आस्था का केंद्र है।
ऐसे में मंदिर तोड़ना तर्कसंगत नहीं, इसलिए मंदिर को सरकार के अधीन लेकर इसका प्रबंधन जिला प्रशासन को दिया जाए। मंदिर निर्माण के बाद तुंदल पंचायत प्रधान ने 2017 में तहसीलदार कंडाघाट के पास केस दायर किया था।