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आजादी का अमृत महोत्सव: जिस अस्तबल में बंधते थे घोड़े, उस भवन में आज चल रहा कंडाघाट थाना

Tue, 24 Aug 2021 12:23 PM IST
Krishan Singh रमेश ठाकुर, अमर उजाला, कंडाघाट (सोलन)

सार

कंडाघाट थाना जिस भवन में चल रहा है। रियासतकाल में इस भवन में पटियाला के राजाओं के घोड़े बांधे जाते थे। अस्तबल के रूप में इस्तेमाल होने वाले इस ऐतिहासिक भवन में आज पुलिस थाना चल रहा है। अंग्रेजों ने ही भवन को थाने में तबदील किया था। 
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कंडाघाट पुलिस थाना। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कभी कोहिस्तान के नाम से मशहूर कंडाघाट का पुलिस थाना आज भी ब्रिटिश हुकूमत की याद दिलाता है। पुलिस थाना के मुख्य भवन में थोड़ा-बहुत बदलाव जरूर हुआ है, लेकिन यहां मौजूद बंदी गृह रियासत काल से ज्यों का त्यों मौजूद है। महापंजाब के समय कंडाघाट को कभी कोहिस्तान जिले के नाम से जाना जाता था। बुजुर्ग कहते हैं कि अंग्रेजों के समय में ये कोहिस्तान जिला हुआ करता था। कंडाघाट थाना जिस भवन में चल रहा है। रियासतकाल में इस भवन में पटियाला के राजाओं के घोड़े बांधे जाते थे। अस्तबल के रूप में इस्तेमाल होने वाले इस ऐतिहासिक भवन में आज पुलिस थाना चल रहा है। अंग्रेजों ने ही भवन को थाने में तबदील किया था। 

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बताया जाता है कि पुराने समय में पूरे क्षेत्र में एक ही थाना कंडाघाट में हुआ करता था। इसका प्रमाण यह भी है कि 1960 में आईपीएस अधिकारी भगवान दास रोसा ने इस थाने का निरीक्षण किया था। इस बात से तय होता है कि यह थाना ब्रिटिश समय का है। पूर्व सैनिक 76 वर्षीय स्थानीय वरिष्ठ नागरिक रामलाल ठाकुर जब हम छोटे थे तो कंडाघाट स्थित पुलिस थाना में पुलिस की परेड होती रहती थी। उस समय पुलिस का बड़ा रौब हुआ करता था। लोग पुलिस से पुलिस को देखकर डर के मारे छिप जाया करते थे। उन्होंने बताया कि आज भी अपराधी को जिस बंदी गृह में रखा जाता है, वह पुराने समय का है, जो अंग्रेजी हुकूमत की याद दिलाता है। 

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