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सदन में ऑक्सीजन सिलेंडर प्लांट में घोटाले को लेकर तीखी नोकझोंक

Fri, 01 Apr 2016 08:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर के साथ भाजपा विधायक महेंद्र सिंह ठाकुर की नोकझोंक ने सदन में माहौल गरमाया। - फोटो : फाइल फोटो
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आईजीएमसी में स्थापित किए जा रहे ऑक्सीजन गैस सिलेंडर प्लांट को लेकर वीरवार को विधानसभा में भाजपा ने खूब हंगामा किया। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर के साथ भाजपा विधायक महेंद्र सिंह ठाकुर की नोकझोंक ने माहौल गरमाया। स्वास्थ्य विभाग के कटौती प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए विधायक महेंद्र सिंह ने ऑक्सीजन प्लांट में घोटाला होने का आरोप लगाया।
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कहा कि सदन में गलत जानकारी दी जाती है। आरटीआई से मिली जानकारी ने प्लांट के आवंटन और सिलेंडर की कीमत को लेकर बड़ा खुलासा किया है। केंद्र सरकार की अधिसूचना का भी पालन नहीं हो रहा है। सरकार ने ई टेंडर तक नहीं किए। 205 रुपये के एक सिलेंडर को शिमला में 255 रुपये में खरीदा जा रहा है। मंडी की एक कंपनी को काम दिया गया है।

टेंडर प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। रोगी कल्याण समिति की धनराशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। आईजीएमसी ऑक्सीजन प्लांट मामले पर दोबारा विचार करने को कहा। इस आरोप पर स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ने कहा महेंद्र सिंह गलत जानकारी दे रहे हैं।
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सरकार ने प्लांट के आवंटन में पूरी पारदर्शिता बरती है। साल 2011 में भाजपा सरकार के समय में ही मंडी की कंपनी को तीन साल का ठेका दिया गया। कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने पर टेंडर आमंत्रित किए। मामला कोर्ट तक गया। कोर्ट ने याचिका को जुर्माना लगाकर रद्द किया।

कहा कि मंडी से ऑक्सीजन सिलेंडर लाने पर 205 रुपये देने पड़ते थे। इस प्रक्रिया में ट्रक के आने-जाने का खर्च होता था। अब शिमला में प्लांट लगने से 250 रुपये में सिलेंडर अस्पतालों में उपलब्ध होगा। सरकार ने इस फैसले से प्रतिमाह तीन लाख रुपये बचाए जा रहे हैं।

मिला हुआ बजट भी खर्च नहीं पाया स्वास्थ्य विभाग

सदन में विधायक इंद्र सिंह के सवाल के जवाब में इस बात का खुलासा हुआ।
बजट का रोना रोने वाला स्वास्थ्य विभाग मिले बजट को भी पूरी तरह खर्च करने में सक्षम नहीं है। यही कारण है कि पिछले दो साल सरकार रोगों की रोकथाम के लिए प्रचार करने को मिले बजट से लेकर दवाइयों और जननी एक्सप्रेस 102 के लिए मिले बजट को भी खर्च नहीं कर सकी।

वीरवार को सरकाघाट से विधायक इंद्र सिंह के सवाल के जवाब में यह बात सामने आई। जवाब में सरकार ने बताया कि एनएचएम के तहत रोगों की रोकथाम को साल 2013-14 में 2.19 करोड़ के बजट का प्रावधान था। इसमें सरकार 2.17 करोड़ ही खर्च कर सकी।

2014-15 में 3.15 करोड़ के बजट प्रावधान में से सिर्फ 1.55 करोड़ ही खर्च हो सके। जनता के इलाज पर प्रदेश सरकार ने दवाइयों के लिए 2015-16 में 33.06 करोड़ का बजट स्वीकृत किया।

जबकि सरकार सिर्फ 13.84 करोड़ ही खर्च कर पाई। इलाज के लिए मरीजों को निशुल्क एंबुलेंस मुहैया कराने के लिए भी एनएचएम की ओर से सरकार के पास 2013-14 में 34.43 करोड़ का स्वीकृत बजट था। वह खर्च महज 28.84 कर सकी।

साल 2014-15 में स्वीकृत 28.40 करोड़ में से 27.21 करोड़ खर्च हो पाया। जननी एक्सप्रेस को बेहतर बनाने के लिए साल 2014-15 व 2015-16 में कुल साढ़े बारह करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सिर्फ छह करोड़ पैंतीस लाख ही खर्च कर सका।

राजीव बिंदल ने सरकार को दिए सुझाव

भाजपा विधायक डॉ. राजीव बिंदल ने स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए सरकार को सुझाव दिए। - फोटो : फाइल फोटो
कटौती प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए भाजपा विधायक डा. राजीव बिंदल ने स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए सरकार को सुझाव दिए। कहा कि आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस और पीजी सीटों को बढ़ाने के लिए एमसीआई के मानकों को जल्द पूरा किया जाए। इससे सूबे में डॉक्टरों की कमी दूर होगी। विशेषज्ञ डॉक्टर मिलने से स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार होगा।

रेफरल मामलों में कमी आएगी। सुपर स्पेशलाइजेशन के लिए सीटें बढ़ानी चाहिए। नए मेडिकल कॉलेजों में आईजीएमसी, टांडा से स्टाफ बदलने के चलते दिक्कतें बढ़ रही हैं। सरकार को नए मेडिकल कॉलेज सोसाइटी मोड पर चलाने चाहिए। देश में कई जगह इस तरह से काम हो रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने सुझावों पर विचार करने का आश्वासन दिया।

अधिसूचित सुविधाएं हों सुनिश्चित- भाजपा विधायक विजय अग्निहोत्री ने कहा सरकार जिन स्वास्थ्य सुविधाओं को अधिसूचित करती है, उन्हें सुनिश्चित नहीं किया जाता। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के कार्ड जिलों में रिन्यू नहीं होने से गरीब लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 56 दवाएं मुफ्त में देने की व्यवस्था वास्तविकता से दूर है। सरकार को पीलिया से मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा राशि देनी चाहिए।

राजनीति के लिए मत खोलो स्वास्थ्य केंद्र- भाजपा विधायक जयराम ठाकुर ने कहा सरकार को स्वास्थ्य केंद्र मात्र राजनीतिक कारणों से नहीं खोलने चाहिए। सुविधाएं देने पर भी ध्यान देना चाहिए। मौजूदा स्वास्थ्य संस्थानों को सुदृढ़ करना चाहिए। शिलान्यास और उद्घाटन पट्टिकाएं लगाने में भी सरकार को दिलचस्पी नहीं दिखानी चाहिए। कहा कि नए मेडिकल कॉलेजों में आईजीएमसी, टांडा से शिक्षकों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया को बंद करना चाहिए।
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दवाओं के साल्ट लिखने की बंद हो व्यवस्था

हिमाचल लोकहित पार्टी के विधायक महेश्वर सिंह ने कहा कि केमिस्ट महंगी दवाएं बेच रहे हैं। सरकार को इन आदेशों को वापस लेना चाहिए। - फोटो : फाइल फोटो
हिमाचल लोकहित पार्टी के विधायक महेश्वर सिंह ने कहा जिन अस्पतालों में आवासीय सुविधाएं दी गई हैं वहां डॉक्टरों का रात को रहना सुनिश्चित करना चाहिए। सरकार ने डॉक्टरों को आदेश दिए हैं कि ब्रांडेड दवाएं लिखने की जगह दवाओं के साल्ट लिखे जाए। इन आदेशों के चलते केमिस्टों की मनमानी बढ़ गई है। केमिस्ट महंगी दवाओं को बेच रहे हैं। सरकार को इन आदेशों को वापस लेना चाहिए।

स्वास्थ्य सुविधाओं में हिमाचल अव्वल- कटौती प्रस्ताव पर जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ने कहा देश भर में स्वास्थ्य सुविधा के क्षेत्र में हिमाचल अव्वल है। कुछ कमियां हैं, इन्हें दूर करने के प्रयास जारी हैं। भाजपा सरकार के मुकाबले कांग्रेस सरकार ने कई रिक्त पद भरे हैं। कई स्वास्थ्य केंद्र खोले हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत हर चार महीनों में जिला मुख्यालय स्तर पर कार्ड रिन्यू करने का फैसला लिया है। ईएसआई मेडिकल कॉलेज मंडी को शुरू करने को लेकर केंद्र सरकार से बात चल रही है। कॉलेज हैंडओवर होते ही शुरू कर दिया जाएगा। पीजी सीटों को बढ़ाने के प्रयास जारी है। सिंगल सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। दवाओं की गुणवत्ता से र्कोई समझौता सहन नहीं किया जाएगा।
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