मौसम की मार से सेब सीजन पर ब्रेक लग गई है। सड़कें बंद होने से बागवानों को सेब का तुड़ान रोकना पड़ गया है। जिन बगीचों में पतझड़ की समस्या है वहां तुड़ान रोकना भी मुश्किल हो रहा है। मंडियों में सेब न पहुंचने से सेब कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। सड़कों की बदहाल स्थिति के कारण बागवानों के लिए फसल मंडियों तक पहुंचना चुनौती बन गया है। बीते एक हफ्ते से मंडियों में सेब की आमद में भारी कमी आई है।
मौजूदा समय में निचली ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब सीजन सिमटना शुरू हो गया है और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीजन शुरू होने की तैयारी है। मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जहां बगीचों में पतझड़ की मार कम है वहां बागवान 10 से 15 दिन तक तुड़ान रोकने का प्रयास कर रहे हैं। थिनिंग के जरिये तैयार फसल उतारी जा रही है। हालांकि, जहां पतझड़ की समस्या अधिक है वहां तुड़ान रोकना भी संभव नहीं है।
तुड़ान के बाद फसल को मंडियों तक पहुंचाने के लिए सड़कें बहाल करने को लोक सामुदायिक तौर पर श्रमदान या निजी जेसीबी मशीनें मंगवा कर सड़कें खुलवा रहे हैं। हिमाचल की सबसे बड़ी बागवान संस्था प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेंदर सिंह बिष्ट का कहना है कि सेब उत्पादक क्षेत्रों में लिंक रोड की स्थिति बेहद खराब है। सड़कें बंद होने के कारण लोग 10 से 15 दिन तुड़ान रोकने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन, पतझड़ से समस्या पेश आ रही है।
एक हफ्ते से घटी सेब की आमद
प्रदेश की फल मंडियों में बीते एक हफ्ते से सेब की आमद घटी है। निचली ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीजन खत्म होने को है और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीजन शुरू हो रहा है। मौसम खुलने के बाद आने वाले दिनों में सेब की आमद बढ़ेगी ऐसी उम्मीद है।
- हेमिस नेगी, प्रबंध निदेशक, कृषि विपणन बोर्ड
वीरवार को मंडियों में पहुंचीं सेब की पेटियों का विवरण
भट्ठाकुफर 5463, नारकंडा 8792, पराला 14720, खड़ापत्थर 1504