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अस्पताल में सोए रहे डॉक्टर, तड़पता रहा वो मासूम..

Fri, 18 Apr 2014 07:55 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, शिमला
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आईजीएमसी अस्पताल में चार साल का मासूम तड़पता रहा, पर किसी का दिल नहीं पसीजा। इसे दर्द निवारक दवा तक नसीब नहीं हुई। हद तब हो गई जब व्यवस्था से नाराज परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री और चिकित्सा अधीक्षक तक को एसएमएस किया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
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यह एसएमएस अमर उजाला के पास भी साक्ष्य के तौर पर उपलब्ध हैं। इलाज शुरू करने के लिए सोते हुए डाक्टर को उठाया गया तो वह लाल पीला हो गया। चौपाल निवासी रमेश भागटा ने बताया कि चार साल का बेटा सार्थक गिर गया था।

चौपाल अस्पताल के डाक्टरों ने उसे इलाज के लिए आईजीएमसी रेफर कर दिया। आईजीएमसी में मंगलवार को शाम सात बजे पहुंचे। बेटे का सिटी स्कैन, अल्ट्रा साउंड और एक्सरे कराने के लिए डाक्टर ने कहा। हालांकि, उपचार शुरू नहीं किया।
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डॉक्टरों ने दिखाई लापरवाही

डाक्टर का कहना था कि रिपोर्ट आने के बाद उपचार होगा। रात 12 बजे सारी रिपोर्ट आईं, लेकिन तब तक डाक्टर सोने के लिए चले गए थे। जो जूनियर डाक्टर थे। उनकी ओर से जवाब दिया जा रहा था कि यह केस उनके सीनियर का है।

इस दौरान परिजनों की ओर से इलाज शुरू कराने के लिए स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर से लेकर चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश तक को मोबाइल फोन और एसएमएस किया, लेकिन कोई भी रिस्पांस देने के लिए तैयार नहीं था।

रात को दो बजे आपातकालीन कक्ष में सोते हुए जगाने पर डाक्टर ‘साहब’ भड़क गए। अगले दिन सुबह डाक्टर ने पूरी रिपोर्ट देखने के बाद दो ऐसी दवाएं लिख दी, जो पूरे शिमला में नहीं मिली। मायूस होकर रमेश अपने बच्चे के साथ दोपहर बाद वापस चौपाल चला गया।
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इनके लिए तो इलेक्शन जरूरी

स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि कि मैं इलेक्शन की बैठक में हूं। बाद में बात करना। वैसे मेरे पास कोई एसएमएस या फोन नहीं आया है।
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