हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद हिमाचल के मंदिरों में पशु बलि जारी है। कोर्ट के फैसले को न मानते हुए कुछ लोगों ने जिला चंबा के उपमंडल भरमौर के एक मंदिर में बकरों की बलि दे दी।
दुर्गम पंचायत कुगती में स्थित इस मंदिर में नवरात्रों के उपलक्ष्य एक नहीं बल्कि 32 बकरे चढ़ाए गए। बताया जा रहा है कि इनमें से लोगों ने 11 बकरों की मंदिर के समीप बलि दे डाली, अन्य बकरों को विहिप के कार्यकर्ताओं ने बलि से पहले बचा लिया।
इस दौरान विहिप कार्यकर्ताओं और बलि के लिए बकरे लेकर आए लोगों में काफी बहस भी हुई।
देवदोष के डर से हाईकोर्ट का फैसला नहीं माना
विहिप ने हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए लोगों को समझाया और कहा कि मंदिर में बलि नहीं दी जाएगी। पशु बलि पर हाईकोर्ट ने रोक लगाते हुए इस प्रथा के विरोध में फैसला दिया है। इस फैसले की पालना के लिए कई संगठन और संस्थाएं भी आगे आ रहे हैं।
विहिप के मैहला खंड के अध्यक्ष बालक राम, सदस्य जोध सिंह ने कहा कि उनके साथ विहिप के कई लोग कुगती पहुंचे थे। उन्होंने कुछ बकरों को बलि चढ़ने से पहले ही बचा लिया। मैहला के उप प्रधान मनोज जसरोटिया ने बताया कि मंदिर में आसपास के क्षेत्रों के लोग नवरात्रों में बलि देते हैं।
यह प्रथा सदियों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि सोमवार को कुछ लोगों ने बलि प्रथा का विरोध कि या। चंबा से डीके शर्मा, सुधीर कुमार, सुरेश, सलूणी से चैन लाल, ज्ञान चंद समेत कई ग्रामीणों ने कहा कि सदियों से चली आ रही इस प्रथा को बंद नहीं किया जा सकता। देव कारजों में सदियों से पशु बलि का प्रावधान है। यह प्रथा सदियों से चली आ रही है।