मोदी सरकार ने आम बजट में भले ही हिमाचल को कुछ खास न दिया हो लेकिन हिमालयन रीजन के राज्यों की परंपरागत खेलों के लिए अलग से प्रतियोगिता करवाने का ऐलान कर बड़ी राहत दी है। इससे यहां के पर्यटन कारोबारियों को बड़ा फायदा हो सकता है।
पर्यटन का हिमाचल में बड़ा महत्व है लेकिन यहां अपार संभावनाएं होने के बावजूद सरकारें इसका पूरा दोहन नहीं कर पाई हैं। यदि यहां स्कीइंग, पैराग्लाइडिंग, स्केटिंग, रॉक क्लाइमिंग जैसे खेल विकसित होते हैं तो ज्यादा सैलानी प्रदेश रुख करेंगे।
प्रदेश में पिछले काफी समय से साहसिक खेलों के आयोजन को लेकर दावे होते आए हैं लेकिन ये कभी पूरे नहीं हुए। यदि अब इन्हें पूरा किया जाता है तो प्रदेश में सैलानियों की संख्या और बढ़ जाएगी जिससे हजारों कारोबारियों का सीधा फायदा होगा।
पहाड़ी राज्यों के लिए फायदेमंद है ये खेल
हिमाचल के अलावा जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम जैसे नार्थ-ईस्ट के राज्यों में ये प्रतियोगिताएं होंगी और इनमें नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देशों को भी बुलाया जाएगा, जो हिमालयन रीजन में आते हैं।
इसके तहत हिमाचल को अलग से एक हिमालयन खेल अकादमी भी मिल सकती है। हालांकि इस बारे में स्थिति साफ नहीं है। हिमाचल में इससे पहले केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट पाइका के तहत खेलें चल रही हैं।
स्कूली खेलों को इसमें जोड़ा गया है। इस प्रोजेक्ट में भी केंद्र सरकार संशोधन करने जा रही है। अब इसे मंडल स्तर का किया जा रहा है।
सौर ऊर्जा हब बनेगा लाहौल
मोदी सरकार ने हिमाचल प्रदेश को एक और सौगात दी है। प्रदेश के लाहौल स्पीति जिले को सौर ऊर्जा से रोशन करने का आम बजट में प्रावधान किया है। इससे प्रदेश को काफी लाभ मिलेगा। क्योंकि, अभी तक लाहौल स्पीति में न तो जल विद्युत परियोजनाओं से बिजली पहुंचाने में बहुत अधिक सफलता नहीं मिल पाई है।
सौर ऊर्जा के प्लांट स्थापित किये जाने से लाहौल स्पीति जिले को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस जिले की भौगोलिक स्थितियां काफी विषम होने के कारण ट्रांसमिशन लाइनें भी टिक नहीं पाती हैं। भारी बर्फबारी होने की स्थिति में लाइनें क्षतिग्रस्त हो जाती है। ऐसे में अगर सौर ऊर्जा के सयंत्र स्थापित किये गए तो निश्चित तौर पर लाहौल स्पीति जिले के लोगों को लाभ मिलेगा।
कैबिनेट में तय होगा कहां बनेगा आईआईएम
हिमाचल के लिए घोषित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के लिए अब नई चर्चा ये है कि अब ये खुलेगा कहां? इससे पहले हिमाचल को आईआईटी मिला था, जो मंडी में खोला गया। केंद्रीय विश्वविद्यालय मिला तो वह धर्मशाला और देहरा के बीच फंसा है। अब आईआईएम के लिए जगह के चयन का सवाल है।
तकनीकी शिक्षा मंत्री जीएस बाली कहते हैं कि आईआईएम अब कहां खुलेगा, इस बारे में मसला कैबिनेट में रखा जाएगा और वहीं इस पर फैसला होगा। इसके लिए केंद्र सरकार को जितनी भी भूमि की आवश्यकता होगी, हिमाचल सरकार उपलब्ध करवाएगी।