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भूगोल के छात्रों के लिए बड़ी राहत, पढ़ें जरूर..

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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से एमए भूगोल की डिग्री लेने वाले छात्रों को अब देश के अन्य संस्थानों में एडमिशन का रास्ता खुल गया है। विवि प्रशासन ने फैसला लिया है कि वह एमए भूगोल के छात्रों को एमएससी की डिग्री देगा।
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इससे अब हिमाचल विवि के छात्र इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (आईआईआरएस) देहरादून, सेंटर फॉर एन्वायरमेंटल प्लानिंग एंड टेक्नालॉजी (सीईपीटी) अहमदाबाद और एमटेक जैसे डिग्री कोर्सों में प्रवेश के लिए पात्र होंगे।

ईसी से मंजूरी मिलने के बाद अब भूगोल विभाग से पीजी करने वाले सभी छात्रों को एमएससी की ही डिग्री मिलेगी। इसमें यह मायने नही रखेगा कि छात्र ने स्नातक स्तर तक किस संकाय में पढ़ाई की है।
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ईसी की बैठक में मिली मंजूरी

इससे पूर्व विवि के छात्रों को इस संस्थान सहित उन तमाम राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में इसलिए प्रवेश नहीं दिया जाता था, क्योंकि विवि से उन्हें एमए की डिग्री मिलती थी।

हालांकि, ये छात्र भी एमएससी भूगोल के छात्रों की तरह पढ़ाई करते थे। छात्रों को पेश आने वाली इस समस्या को दूर करने के लिए अब प्रदेश विश्वविद्यालय भूगोल विभाग से मास्टर डिग्री करने वाले छात्रों को एमएससी भूगोल की डिग्री देगा।

डिग्री का नाम बदलने के लिए 24 जून को हुई विवि कार्यकारी परिषद की बैठक में हरी झंडी मिल चुकी है। ईसी ने डिग्री का नाम एमएससी भूगोल करने को कमेटी बनाई है।

इसमें डीएस प्रो. टीसी भल्ला अध्यक्ष और विभागाध्यक्ष प्रो. डीडी शर्मा समन्वयक होंगे। कमेटी इस प्रक्रिया को पूरा कर इसे अंतिम मंजूरी के लिए ईसी में रखेगी।
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साइंस और कला संकाय में भूगोल की पढ़ाई

विश्वविद्यालय के यूजी डिग्री कोर्स में साइंस और कला दोनों संकाय में छात्र भूगोल विषय पढ़ते हैं। दोनों संकाय के छात्रों को विवि के भूगोल विभाग में प्रवेश दिया जाता है।

एक जैसा सिलेबस होने के बावजूद पीजी डिग्री पूरी होने पर भी यूजी में कला संकाय से पढ़े छात्रों को एमए भूगोल और विज्ञान संकाय के छात्रों को विवि एमएससी भूगोल की डिग्री देता है।

इससे कला संकाय के छात्रों को अच्छे संस्थानों में सिर्फ एमए होने पर प्रवेश नहीं मिलता। छात्र लगातार डिग्री को एमएससी भूगोल करने की मांग उठाते रहे। करीब आठ साल से विभाग के माध्यम से छात्र यह मांग उठाते रहे हैं।
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