फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

70 फीसदी अनुदान पर मिलेंगी सौर फोटो वोल्टिक लाइटें: वीरभद्र

Sat, 09 Apr 2016 09:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश के लोग नवीन एवं नवीकरण ऊर्जा मंत्रालय के दिशा निर्देशानुसार 70 प्रतिशत अनुदान पर सौर फोटो वोल्टिक लाइटों के रूप में ऊर्जा साधन को अपना सकते हैं। यह बात मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को हिम ऊर्जा की शासकीय निकाय की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि ग्रिड से जुड़े रूफ टॉप सौर पैनलों, ऊर्जा प्लांटों के लिए 70 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि राज्य के दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को 24 घंटे सौर ऊर्जा सुनिश्चित बनाने के लिए हिम ऊर्जा ने एक योजना आरंभ की है। इसके तहत प्रत्येक लाभार्थी को एक से 168 किलोवाट तक ऊर्जा उपलब्ध करवाई जाएगी। जनजातीय क्षेत्रों के अलावा अभी तक 46 आपूर्ति आदेश प्राप्त हो चुके हैं।

वीरभद्र सिंह ने कहा कि जल विद्युत ऊर्जा महंगी होने के बावजूद हिम ऊर्जा ने राज्य के दूरदराज एवं जनजातीय क्षेत्रों में 100 किलोवाट से लेकर 5 मेगावाट क्षमता के 10 जल विद्युत परियोजनाएं स्थापित की हैं। भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरण ऊर्जा मंत्रालय की ओर से शिमला और हमीरपुर शहरों को सौर सिटी के रूप में विकसित करने के लिए अंतिम मास्टर योजना स्वीकृत की गई है।
विज्ञापन


इस परियोजना के तहत पंचायत भवन शिमला में 15 किलोवाट, पुराना बस अड्डा शिमला में 20 किलोवाट क्षमता के पावर प्लांट आरंभ किए हैं। रिज मैदान पर 20 किलोवाट का सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित करने के लिए धरोहर समिति से स्वीकृति की प्रतीक्षा है । इसके अलावा कुल्लू के दलाश और अरसू, चंबा के भरमौर और डलहौजी, किन्नौर के कल्पा, मूरंग और पूह, लाहौल स्पीति के काजा, केलंग, लिंगटी, कांगड़ा के धर्मशाला और शिमला जिले के चौपाल में पवन ऊर्जा प्लांट स्थापित करने के प्रयास जारी हैं।

शिमला के फेयरलॉन में 100 किलोवाट, किब्बर में 10 किलोवाट और विवि में 50 किलोवाट क्षमता के सौर फोटोवोल्टिक ऊर्जा प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। बैठक में कृषि मंत्री सुजान सिंह, विधायक अजय महाजन, मुख्य सचिव पी मित्रा, अतिरिक्त मुख्य सचिव वीसी फारका, हिम ऊर्जा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भानु प्रताप सिंह, निदेशक केएल ठाकुर और गैर सरकारी सदस्य उपस्थित थे।
विज्ञापन

चाय बागानों के विस्तार पर जोर दें उद्यमी: सीएम

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह - फोटो : फाइल फोटो
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने प्रदेश में चाय के उद्यम धीरे-धीरे कम होने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के उद्यमियों को चाय की पैदावार के लिए नए क्षेत्रों का पता लगाने के बजाय कांगड़ा में चाय की खेती वाले मौजूदा बागानों के विस्तार, सुधार एवं पुनर्जीवित करना चाहिए। सीएम ने यह बात शुक्रवार को चाय विकास बोर्ड की बैठक की समीक्षा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि कांगड़ा के चाय बागान प्राकृतिक तौर पर सिकुड़ते जा रहे हैं तथा मौजूदा इकाइयों में परिवर्तन हो रहा है। अगर चाय बागानों का सुधार और नई पौध तैयार नहीं की गई तो यह लंबे समय तक लाभ का उद्यम नहीं रहेगा।

बैठक के दौरान चाय बोर्ड के सदस्यों ने भी मानव शक्ति के अभाव में बहुत से चाय बागानों के बागवानी छोड़ने की बात उठाई। इस पर वीरभद्र सिंह ने 10 हेक्टेयर से कम क्षेत्र में चाय का उत्पादन कर रहे उत्पादकों को यांत्रिक कटाई उपकरण एवं छंटाई मशीनों पर अनुदान के संबंध में मामला भारतीय चाय बोर्ड से उठाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि कांगड़ा की चाय काफी पसंदीदा एवं प्रसिद्ध है, लेकिन इसके उत्पादन के लिए  किसानों के पास काफी कम भूमि है।

उन्होंने कहा कि अनुदान के लिए 10 हेक्टेयर के मानदंडों में छूट दिए जाने की आवश्यकता है। इस दौरान उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड के मॉडल, जिसमें वन भूमि, पंचायत एवं निजी भूमि को निश्चित समयावधि के लिए पट्टे पर लेकर और इसे लघु एवं सीमांत किसानों को प्रदान उपलब्ध करवाकर इस भूमि पर लगाए गए चाय के बागान का अध्ययन करने के लिए सदस्यों ने सुझाव दिया।

इस पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि इस संबंध में मशीनीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से चाय बागानों में परिवर्तन एवं सुधार के प्रयास किए जाएंगे। बैठक में कृषि एवं बहुउद्देशीय ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया, मुख्य सचिव पी मित्रा, प्रधान अरण्यपाल एसपी वासुदेवा, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव राकेश शर्मा और बोर्ड के गैर सरकारी सदस्य भी उपस्थित थे।

नए क्षेत्रों की भी हो रही तलाश- कांगड़ा में चाय बागानी को मजबूती देने के साथ ही बैजनाथ के समीप होल्टा में चाय के पौधों का रोपण किया जा रहा है। इसके अलावा चाय की खेती के लिए अनुकूल जलवायु वाले और क्षेत्रों का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव उपमा चौधरी ने बताया कि राज्य के लघु एवं सीमांत चाय उत्पादकों को सहायता प्रदान करने के लिए 7.20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भारतीय चाय बोर्ड को भेजा गया है।

नवंबर में होगा राष्ट्रीय सेमिनार- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के माध्यम से कांगड़ा की चाय को और अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए नवंबर महीने में चाय उत्पादकों के सहयोग से राष्ट्रीय सेमिनार एवं प्रदर्शनी का आयोजन करवाया जाएगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें