सर्किट हाउस रामपुर बुशहर में प्रेस वार्ता करते पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल।
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भाजपा विधायक दल के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र के बगीचों की देखरेख मैंने नहीं की। जिन बगीचों में कुछ साल पहले तक लाखों की आमदनी होती थी, उनमें कुछ ही साल के बाद करोड़ों का सेब कैसे पैदा गया है?
इससे स्वयं ही संदेह की सुई मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर घूमनी स्वाभाविक थी। पूर्व मुख्यमंत्री शुक्रवार को रामपुर के सर्किट हाउस में प्रेस सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से जब सवाल पूछा गया कि जब भी केंद्रीय जांच ब्यूरो मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई करती है तो आरोप लगाया जाता है कि यह सारा खेल परदे के पीछे से धूमल कर रहे हैं।
इस सवाल पर धूमल ने कहा कि मैंने कभी वीरभद्र सिंह के बगीचों की देखभाल नहीं की और न ही उनके सेब बाजार में स्कूटरों, कारों और टैंकरों से मार्किट में भेजे। मुख्यमंत्री के जिन बगीचों से कुछ साल पहले तक लाखों के सेब पैदा होते थे, उनमें ऐसा क्या हुआ जो कुछ वर्ष पहले से करोड़ों के सेब पैदा होने लग गए?
इसके अलावा जिन ट्रकों में यह सेब भेजा गया, उन ट्रकों के नंबरों की जांच की गई तो वह स्कूटरों, कारों और तेल के टैंकरों के निकले। सीबीआई को दाल में काला दिखा तो जांच से परते खुलती चली गई। अब मुख्यमंत्री उनपर बेबुनियाद आरोप लगाने का कोई मौका नहीं चूक रहे।
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आनी में जनसभा को संबोधित करते पूर्व सीएम व नेता प्रतिपक्ष प्रो. प्रेम कुमार धूमल।
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पूर्व सीएम ने कहा कि वीरभद्र सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है तो मंत्री और विधायक पैरवी पर उतर कर बयान देना शुरू कर देते हैं परंतु आपके पक्ष में भाजपा नेता बयान देने से गुरेज करते हैं, क्यों? कई भाजपा नेता मेरे पक्ष में बयान देते हैं। उन्होंने कहा कि कई मंत्रियों को यह पता नहीं होता कि उनके नाम से वीरभद्र सिंह के पक्ष में क्या बयान जारी किया गया है?
धूमल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने विश्वविद्यालय में बैक डोर नियुक्तियों की और शिकायत आने पर भाजपा सत्ता में आकर जांच कराएगी। प्रदेश सरकार ने भारत-पाक क्रिकेट मैच धर्मशाला में नहीं कराने दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश पर 46 हजार करोड़ से अधिक का कर्जा है। जब पूछा कि मंत्रियों और विधायकों का वेतन बढने का विरोध क्यों नहीं किया? उन्होने कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में हिमाचल में वेतन कम था।
प्रदेश के मंत्रियों और विधायकों की वेतन वृद्धि जायज है। उन्होंने कहा कि पीलिया पर काबू पाने में प्रदेश सरकार विफल रही और अब पेयजल संकट है। मुख्यमंत्री के विस क्षेत्र तक में हफ्ते बाद पेयजल मिल रही है। सरकार विकास करने में विफल रही है और मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र रामपुर की सड़क की हालत खस्ता है। अन्य क्षेत्रों की सड़कों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।