वित्त वर्ष 2020-21 की पंद्रहवें वित्तायोग की टाइड ग्रांट की पहली किस्त के रूप में देश भर के राज्यों के लिए 13020.60 करोड़ जारी किए गए हैं। यह ग्रांट 23 राज्यों के लिए दी गई है। केंद्र सरकार ने निर्देेश दिए हैं कि अगर इसे जारी करने में 10 दिन से अधिक की देरी की जाती है तो ब्याज भी देना होगा।
हिमाचल प्रदेश में गांवों में करीब छह महीने बाद सड़कों, रास्तों और भवनों आदि के काम शुरू होंगे। अप्रैल के बाद पंद्रहवें वित्तायोग के तहत टाइड फंड की पहली किस्त जारी की गई है। इससे पंद्रहवें वित्तायोग के तहत भेजी शेल्फों के काम अब नहीं रुकेंगे। केंद्र सरकार ने इस संबंध में राज्य सरकार के लिए लंबित 95.10 करोड़ की ग्रांट जारी कर दी है। राज्य सरकार को इस बजट को समय रहते स्थानीय ग्रामीण निकायों को जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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किसी भी तरह की लेटलतीफी पर राज्य सरकार को ब्याज भी देना होगा। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तायोग मंडल के निदेशक अभय कुमार ने इस संबंध में हिमाचल सरकार के सचिव वित्त और सचिव पंचायत राज को इस बारे में पत्र भी लिखा है।
वित्त वर्ष 2020-21 की पंद्रहवें वित्तायोग की टाइड ग्रांट की पहली किस्त के रूप में देश भर के राज्यों के लिए 13020.60 करोड़ जारी किए गए हैं। यह ग्रांट 23 राज्यों के लिए दी गई है। केंद्र सरकार ने निर्देेश दिए हैं कि अगर इसे जारी करने में 10 दिन से अधिक की देरी की जाती है तो ब्याज भी देना होगा।
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पंद्रहवें वित्तायोग को ग्राम पंचायतों से ये सड़कों, रास्तों, भवनों आदि के निर्माण की ये शेल्फें कई महीने पहले भेजी जा चुकी थीं, मगर बजट रिलीज नहीं होने से काम शुरू नहीं किया जा सका। अब इस पैसे को ग्राम पंचायतों, जिला परिषदों और पंचायत समितियों को बांटा जाएगा।