अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पास बेशक शिक्षा महकमा हो, पर अफसरशाही का उनके जिले की शैक्षणिक व्यवस्था पर कोई खास ध्यान नहीं है। इसका उदाहरण शिमला का प्रारंभिक उपनिदेशक कार्यालय है। इस कार्यालय में 39 मंजूर पदों में से 27 खाली चल रहे हैं। केवल 12 कर्मचारी ही यहां पूरा काम संभाले हैं और कामकाज के बोझ तले दबे हैं।
इस कार्यालय में अधीक्षक ग्रेड-दो के छह पद मंजूर हैं। इनमें से तीन अधीक्षक ही यहां तैनात हैं। इनके तीन पद रिक्त चल रहे हैं। वरिष्ठ सहायक के 14 मंजूर पदों मेें से 10 खाली चल रहे हैं और केवल चार पद ही भरे हुए हैं। क्लर्क के 19 स्वीकृत पदों में से केवल 14 रिक्त चल रहे हैं केवल पांच पद ही भरे हुए हैं। दूसरी ओर अधिकारियों के यहां चार पद स्वीकृत हैं और ये चारों के चारों भरे हुए हैं। ये उपनिदेशक, सहायक निदेशक, डिप्टी डीईओ और अनुभाग अधिकारी के हैं।
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ध्यान में नहीं मामला : नेगी
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के प्रधान सचिव एवं प्रधान सलाहकार टीजी नेगी ने कहा कि ये तथ्य उनके ध्यान में नहीं है कि उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा शिमला के कार्यालय में इतने पद रिक्त चल रहे हैं। वे शिक्षा विभाग से पूछेंगे कि ऐसा क्यों है। खाली पदों को जल्द भरा जाएगा।