आईजीएमसी में साफ करवाए पानी के टैंक
पानी के सैंपल फेल होने के बाद जागा अस्पताल प्रशासन
बुधवार दोपहर 12 से तीन बजे तक चला सफाई अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। आईजीएमसी में गंदे पानी की आपूर्ति होने का मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन बुधवार को हरकत में आया। प्रशासन ने दोपहर के समय अस्पताल के लोक निर्माण विभाग के साथ मिलकर तीनों टैंकों की सफाई करवा दी।
प्रशासन ने सभी विभागों को सुबह नौ बजे ही इसकी सूचना दे दी थी। इसके बाद सभी ने जरूरत के हिसाब से पानी स्टोर कर लिया लेकिन दिन के समय अस्पताल पहुंचे सैकड़ों मरीजों और तीमारदारों के लिए पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई थी। वार्डों में भर्ती मरीज पानी के लिए तरसते रहे। दोपहर 12 से तीन बजे तक पानी की सप्लाई बंद रहने से सभी को बाहर दुकानों से पानी खरीदना पड़ा। उधर, लोक निर्माण विभाग का दावा है कि टैंक की सफाई कुछ दिन पहले ही की थी। ऐसे में इस बार टैंक में गंदगी कम थी। गंदे पानी की सप्लाई को लेकर अस्पताल पर सवाल उठने के बाद अब प्रशासन हर तीसरे महीने टैंक और टंकियों की सफाई करवाएगा। पानी के दोबारा से सैंपल भी लिए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में भी अस्पताल प्रशासन पानी की गुणवत्ता की जांच करवाएगा।
पानी न मिलने से मरीज, तीमारदार हुए परेशान
अस्पताल में सप्लाई बंद होने से मरीज और तीमारदार परेशान हुए। अस्पताल में भर्ती अपनी मां के लिए चंबा निवासी मनोज को दुकान से पानी खरीदना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को दिन के समय कोई वैकल्पिक सुविधा देनी चाहिए थी। अस्पताल में तैनात सुरक्षा कर्मचारी सुमन को भी दुकान से पानी खरीदना पड़ा।
फेल पाए गए थे पानी के सैंपल
अस्पताल से 31 मार्च को पानी के सैंपल लिए गए थे, जिनकी रिपोर्ट दो अप्रैल को आई। रिपोर्ट में पाया गया कि यह पानी पीने योग्य नहीं है। नगर निगम ने तुरंत इसकी जानकारी अस्पताल प्रशासन को दे दी थी जिसके बाद अब सभी टैंकों की सफाई करवा दी गई है।
क्या कहते हैं चिकित्सा अधीक्षक
अस्पताल के सभी तीन पानी के टैंकों की सफाई करवा दी गई है। हर तीन महीने में अब सफाई सुनिश्चित की जाएगी। अस्पताल में स्वच्छ पेयजल के लिए एक्वागार्ड की भी सुविधा है।
डॉ. जनकराज, चिकित्सा अधीक्षक आईजीएमसी अस्पताल शिमला