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18 लाख का हिसाब नहीं दे पा रहे सुपरवाइजर, आखिरी मौका

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कूड़ा फीस घोटाले में फंस सकते हैं कई सुपरवाइजर
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18 लाख का हिसाब नहीं दे पा रहे सुपरवाइजर, अब आखिरी मौका
नगर निगम दर्ज करवा सकता है मुकद्मा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहरवासियों से वसूली गई कूड़े की फीस में किए 18 लाख रुपये के घपला मामले में सैहब सोसायटी के कई सुपरवाइजर फंस सकते हैं। नगर निगम प्रशासन इन कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करने जा रहा है।
फीस वसूली के लिए अतिरिक्त समय मिलने के बावजूद घाटा कम करने में नाकाम रहे इन सुपरवाइजरों के पास अब कार्रवाई से बचने का आखिरी रास्ता बचा है। सात अप्रैल तक इन्हें उन लोगों की लिस्ट निगम को सौंपनी होगी, जिन्होंने जनवरी से शुल्क नहीं दिया है। यदि घाटे के मुताबिक यह लिस्ट नहीं दी, तो इन कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो सकता है। उधर, सोसायटी के अकाउंट ऑफिसर ने अपनी रिपोर्ट नगर निगम प्रशासन को सौंप दी है। इसके अनुसार जनवरी में कुल वसूली 22 लाख रुपये ही रही है। नगर निगम ने जनवरी में घरेलू उपभोक्ताओं की फीस 50 से 75 जबकि व्यावसायिक की दोगुना कर दी थी। ऐसे में निगम को 40 लाख रुपये आय की उम्मीद थी। लेकिन, यह 22 लाख पर ही सिमट गई। अब फरवरी की वसूली भी 35 लाख ही हो पाई है।
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31 मार्च तक भी नहीं कर पाए वसूली
घपला सामने आने के बाद निगम प्रशासन ने सोसायटी को तलब किया था। इसके बाद यूनियन ने रिकवरी के लिए 31 मार्च का समय मांगा था, लेकिन आय का आंकड़ा 22 से ऊपर नहीं चढ़ पाया। उधर, नगर निगम प्रशासन ने पहले ही इस मामले पर जांच बिठा रखी है। इसकी रिपोर्ट आते ही सुपरवाइजरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा। घपले में कितने कर्मचारी शामिल हैं, इसका खुलासा अगले हफ्ते तक हो जाएगा। निगम आयुक्त रोहित जम्वाल का कहना है कि जांच रिपोर्ट का इंतजार है। अगले दो-तीन दिन में रिपोर्ट मिल जाएगी, जिसके बाद आगामी कार्रवाई करेंगे।
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कई लोगों का कट सकता है बिजली-पानी
सैहब सोसायटी का दावा है कि सैकड़ों व्यावसायिक संस्थानों ने जनवरी से शुल्क जमा नहीं करवाया है। निगम के कहने पर सोसायटी सुपरवाइजर इनकी लिस्ट भी तैयार कर रहे हैं। नगर निगम प्रशासन ऐसे उपभोक्ताओं का बिजली और पानी काटने की भी तैयारी कर रहा है। उधर, व्यावसायिक संस्थान फीस का इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि नगर निगम ने मीट शॉप, किराने, ढाबे आदि की फीस कई गुणा तक बढ़ा दी है।
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