फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बैंगलुरु की बनशंकरी फूल बेचकर चलाती हैं घर, बनना चाहती हैं डॉक्टर

Sat, 10 Jul 2021 09:12 AM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बनशंकरी फूल बेचकर पढ़ाई करती हैं ताकि वे आगे चलकर कुछ बड़ा कर सकें। गरीब होने का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि बड़े ख्वाब नहीं देखे सकते हैं। बनशंकरी आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहती हैं। 
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बैंगलुरु में रहने वालीं बनशंकरी डॉक्टर बनना चाहती हैं और फिलहाल वे फूल बेचकर अपना गुजारा कर रही हैं। बनशंकरी पिछले 5 वर्षों से सुबह 8 से दोपहर 5 बजे तक फूल बेचती हैं। बनशंकरी फूल बेचते समय भी जो थोड़ा बहुत समय मिलता है, उसमें पढ़ाई करती हैं। वे फिलहाल नहीं जानती हैं कि वे किस तरह से डॉक्टर बनेंगी लेकिन वे ख्वाब देखना नहीं छोड़ती हैं। जानिए बनशंकरी की कहानी। 

बनशंकरी को मिलेगा लेपटॉप

फिलहाल बनशंकरी अपने हिसाब से मोबाईल पर जो उन्हें समझ पढ़ता है, वे पढ़ाई करती हैं लेकिन जल्द वे अपनी पढ़ाई को आसानी से कर सकेंगी क्योंकि बीबीएम्पी चीफ कमिश्नर गौरव गुप्ता को उनके ख्वाब के बारे में पता चला है और वे उनकी सहायता करेंगे। उन्हें लैपटॉप दिया जाएगा। 

विज्ञापन


अधिक आमदनी नहीं होती

बनशंकरी के परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे उसे पढ़ा सकें। बनशंकरी बहुत मेहनती हैं, वे परिवार चलाने में सहायता करने का प्रयास कर रही हैं। बनशंकरी पिछले लंबे समय से यह फूल बेचने का काम कर रही हैं लेकिन इससे उन्हें बहुत अधिक आमदनी नहीं हो पाती है। 

काम करके भी करती हैं पढ़ाई

बनशंकरी जब दिन में फूल बेचकर जाती हैं तब वे एक से दो घंटे के लिए पढ़ाई करती हैं और घर काम में मां का हाथ बंटाकर वे फिर से फूल बेचने के लिए लौट आती हैं। त्योहारों पर उनके फूल अच्छे बिकते हैं। सामान्य दिनों में कई बार वे खाली बैठती हैं तो वे पढ़ाई ही किया करती हैं। 

 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें