अधीनस्थ न्यायालय के दंडादेश पर क्रियान्वयन स्थगित
बुधवार को भारी सुरक्षा के बीच गोपालजी को कोर्ट में पेश किया गया। न्यायालय ने उन्हें सात साल की सजा सुनाई थी। जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था। बृहस्पतिवार को गोपालजी की सजा के खिलाफ उनके अधिवक्ता शचींद्र प्रताप सिंह ने प्रभारी जिला जज संतोष तिवारी की अदालत में अपील दायर की।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वर्ष 1998 से यह मामला लंबित था। दोषसिद्ध के दौरान विचारण जमानत पर रहा। उसके द्वारा कभी जमानत का दुरुपयोग नहीं किया गया है। हमेशा विचारण कार्रवाई में सहयोग किया गया। इस पर प्रभारी जिला जज ने प्रकरण में अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित निर्णय एवं दंडादेश का क्रियान्वयन अपील लंबर अवधि तक स्थगित कर दिया।
जेल से बाहर निकलने पर हुआ जोरदार स्वागत
जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए अपीलार्थी को दो लाख रुपये की जमानत व समान धनराशि का स्वबंध अधीनस्थ न्यायालय के समक्ष दाखिल करने पर अपील निस्तारण अवधि तक जमानत पर रिहा करने का आदेश सुनाया। अदालत ने यह भी कहा कि दोषसिद्ध द्वारा अपील के शीघ्र निस्तारण में सहयोग नहीं किया जाता है तो अपीलीय न्यायालय को यह अधिकार होगा कि वह अपीलार्थी की जमानत निरस्त कर दे।
जमानत स्वीकार होते ही कोषागार में धनराशि जमा करा दी गई। कोर्ट से रिहाई का परवाना जेल पहुंचने के बाद निवर्तमान एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह को शाम को रिहा कर दिया गया। जेल के बाहर पूर्व सांसद शैलेंद्र कुमार, जिला पंचायत सदस्य बबलू सिंह, सदर ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि गोल्डी सिंह, आरिफ खान, मुक्कू ओझा, जीवेंद्र पाल , अनिल कुमार सिंह लाल साहब समेत बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। जेल से छूटते ही लोगों ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। समर्थकों के साथ वह सीधे प्रताप सदन पहुंचे, जहां राजाभैया, डॉ. केएन ओझा समेत बड़ी संख्या में जनसत्ता दल के पदाधिकारी मौजूद रहे।