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Ram Mandir: दुग्धेश्वरनाथ मंदिर से महंत अवेद्यनाथ ने फूंका था रामजन्म भूमि आंदोलन का बिगुल

Mon, 22 Jan 2024 01:49 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी रुद्रपुर।

सार

महंत अवेद्यनाथ रामजन्म भूमि मुक्ति आंदोलन यज्ञ समिति के अध्यक्ष रहे। उनकी अध्यक्षता में छुआछूत का भेद मिटाकर लोगों को सनातन संस्कृति से जोड़ने का व्यापक कार्यक्रम चला। तब इसाई मिशनरियां तेजी से धर्मांतरण करा रही थी।
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वर्ष 1989 में दुग्धेश्वरनाथ मंदिर पर राम मंदिर आंदोलन को लेकर बैठक करते महंत अवेद्यनाथ।। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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पौराणिक महत्व का दुग्धेश्वरनाथ मंदिर रामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन का भी साक्षी है। तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ ने वर्ष 1989 में इसी मंदिर पर विशाल धर्म संसद बुलाकर रामजन्म भूमि को मुक्त कराने के लिए आंदोलन का बिगुल फूंका था। आज मंदिर निर्माण के साथ यह अपनी सुखद परिणति पर पहुंच रही है।
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दुग्धेश्वरनाथ मंदिर के महंत रमाशंकर भारती ने बताया कि महंथ जी ने हिंदू एकता और समरसता के लिए दुग्धेश्वर नाथ मंदिर को राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की कार्यशाला बना दी थी। वह प्रत्येक माह आरती के उपरांत मंदिर पर आने वाले श्रद्धालुओं को संबोधित करते थे।

महंत अवेद्यनाथ रामजन्म भूमि मुक्ति आंदोलन यज्ञ समिति के अध्यक्ष रहे। उनकी अध्यक्षता में छुआछूत का भेद मिटाकर लोगों को सनातन संस्कृति से जोड़ने का व्यापक कार्यक्रम चला। तब इसाई मिशनरियां तेजी से धर्मांतरण करा रही थी। रुद्रपुर में भी दलित बस्तियों में तमाम लोगों का धर्मांतरण हो चुका था।
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महंत जी ने दलित बस्तियों में सहभोज का आयोजन शुरू कर दिया। गांव गांव कार्यकर्ता दबे कुचले लोगों के बीच जाकर सनातन संस्कृति का प्रचार करने लगे। उनके साथ बैठकर महंत जी स्वयं भोजन करते थे। हिंदुओं को एकजुट कर राममंदिर के आंदोलन को रुद्रपुर से धार दी गई।

वर्ष 1989 में दुग्धेश्वरनाथ मंदिर पर आयोजित धर्म संसद में उनके नेतृत्व में देश के नामचीन धर्माचार्यो का जुटान हुआ। धर्म संसद में जुटे हजारो हिंदूओ को रामजन्म भूमि को मुक्त कराने की शपथ दिलायी गयी। इसी दौरान नारा लगा था ‘बच्चा बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का’। रामजन्म भूमि आंदोलन को लेकर महंत अवेद्यनाथ ने दुग्धेश्वरनाथ मंदिर से जो शुरुआत की, वह आज साकार रूप ले रहा है।

 
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