राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त
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आज रामलला अयोध्या में बने भव्य मंदिर में विराजेंगे। रामलला के विराजमान होने से पहले विशेष पूजा की जाएगी। दोपहर 12 बजकर 05 मिनट पर विशेष पूजा शुरू होगी और 84 सेकंड के विशेष मुहूर्त में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। प्रधानमंत्री मोदी मंदिर में पूजा करेंगे फिर राम लला की मूर्ति से पर्दा उठाएंगे। अयोध्या मंदिर में भगवान राम के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के लिए विशेष मुहूर्त 22 जनवरी 2024 को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट और 08 सेकंड से लेकर 12 बजकर 30 मिनट और 32 सेकंड का शुभ मुहूर्त निर्धारित है। इसी मुहूर्त में भगवान राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। इस तरह से प्राण प्रतिष्ठा के लिए 84 सेकंड का समय बहुत ही खास रहेगा।
आज विराजेंगे प्रभु श्रीराम
आज मंगल ध्वनि के साथ शुरू होगी राम लला की प्राण प्रतिष्ठा की पूजा। 84 सेकंड के विशेष शुभ मुहूर्त में वैदिक क्रियाएं और शुभ संस्कार के माध्यम से राम लला के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।
मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के लिए पिछले 6 दिनों से अनुष्ठान जारी
आज सभी रामभक्त का इंतजार खत्म हो रहा है। वर्षों बाद प्रभुराम अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर विराजेंगे। प्राण-प्रतिष्ठा की पूरी विधि होने के बाद आमजन भगवान श्रीराम के दर्शन कर पाएंगे। रामलला मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा का वैदिक अनुष्ठान 16 जनवरी से जारी है और आज प्राण प्रतिष्ठा का अंतिम शुभ संस्कार के साथ मंदिर में प्रभु राम विराजेंगे। 16 जनवरी को सबसे पहले मुख्य यजमान द्वारा प्रायश्चित्त क्रिया की गई, फिर इसके बाद कलश पूजन के साथ मूर्ति का नगर भ्रमण कराया गया और मंदिर में प्रवेश के साथ जलयात्रा और अधिवास शुरू हुए। अधिवास में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के पहले मूर्ति जल,अन्न, औषधि, केसर, शहद और अन्य पवित्र चीजों से अधिवास कराया गया।
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा: 16 जनवरी का पूजा अनुष्ठान
16 जनवरी से राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के शुभ संस्कार आरंभ हो गए थे। इस दिन सबसे पहले प्राण प्रतिष्ठा की पूजा करने वाले मुख्य यजमान ने प्रायश्चित्त पूजा की। प्रायश्चित्त पूजा में मूर्ति के निर्माण के दौरान भूलवश होने गलतियों के लिए भगवान से क्षमा मांगी जाती है। इसके लिए 16 जनवरी को सरयू नदी में यजमान ने सभी वैदिक क्रियाओं के साथ स्नान किया। इसके बाद गौदान किया और जिस स्थान पर मूर्ति का निर्माण हुआ वहां पर कर्मकुटी हवन किया और रामायम का पाठ संपन्न किया गया।
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा: 17 जनवरी का पूजा अनुष्ठान
प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान के लिए 17 जनवरी को कलश पूजन और कलश यात्रा निकाली गई और ब्राह्राण, बटुक, कुमारी कन्याओं और सुवासिनी पूजा की गई। फिर रामलला की मूर्ति की शोभा यात्रा निकाली गई।
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा: 18 जनवरी का पूजा अनुष्ठान
प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के तीसरे दिन राम मंदिर के गर्भगृह में उस स्थान की पूजा की गई जहां पर रामलला की मूर्ति विराजमान होगी। इस दिन पूजा में तीर्थ पूजा, गणेश-अंबिका और मंडलों की पूजा की गई। फिर इसके बाद मंडप प्रवेश, यज्ञ भूमि की पूजा और वास्तु देवता की पूजा की गई। फिर इसके बाद राम लला की मूर्ति का जलाधिवास, गंधाधिवास किया गया। जलाधिवास में मूर्ति को जल और गंधाधिवास में सुगंधित द्वव्यों से स्नान कराया जाता है।
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा: 19 जनवरी का पूजा अनुष्ठान
जलाधिवास और गंधाधिवास अनुष्ठान के बाद 19 जनवरी को मूर्ति का औषधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास और धान्याधिवास किया गया। यानी मूर्ति को औषधियों के बीच में रखा गया, फिर इसके बाद केसर, घी और कई तरह के अनाजों में मूर्ति को रखा गया है। इसके बाद नवकुंडों की स्थापना की गई और हवन और वेदपारायण किया गया।
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा: 20 जनवरी का पूजा अनुष्ठान
20 जनवरी को मंदिर में 81 कलशों की स्थापना की गई और मंत्रोचार से मूर्ति का शर्कराधिवास और फलाधिवास का अनुष्ठान किया गया। फिर सूरज के ढलने के साथ मूर्ति का पुष्पाधिवास किया गया।
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा: 21 जनवरी का पूजा अनुष्ठान
21 जनवरी को वर्षों से अस्थायी मंदिर में विराजमान रामलला की मूर्ति को नवनिर्मित राम मंदिर में स्थापित की गई। फिर नई मूर्ति को सुबह मध्याधिवास और शाम को शय्याधिवास किया गया। इसमें मूर्ति को शहद में रखा गया और शय्याधिवास में मूर्ति को शय्या पर लिटाया गया।
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा: 22 जनवरी का पूजा अनुष्ठान
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आज यानी 22 जनवरी 2024 को अभिजीत मुहूर्त में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। दोपहर 12 बजकर 29 मिनट और 08 सेकंड से लेकर 12 बजकर 30 मिनट और 32 सेकंड का शुभ मुहूर्त निर्धारित है। इसी मुहूर्त में भगवान राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। इस तरह से प्राण प्रतिष्ठा के लिए 84 सेकंड का समय बहुत ही खास रहेगा।
जय राम रमा रमनं समनं.....
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ऐसी मान्यता है कि प्रभु राम जब लंका से विजय प्राप्ति के बाद अयोध्या वापस आ रहे थे तब जब इसकी सूचना भरत को मिली तो सभी अयोध्यावासी समेत देवी-देवता हर्षित होकर प्रभु का इंतजार करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने स्वयं प्रभु राम के अयोध्या वापस आने की खुशी में स्तुति की थी। भोलनाथ ने स्वयं श्रीराम की स्तुति करते वर्णन इस प्रकार किया था....
जय राम रमा रमनं समनं। भव ताप भयाकुल पाहि जनम॥
अवधेस सुरेस रमेस बिभो। सरनागत मागत पाहि प्रभो॥
राजा राम, राजा राम, सीता राम,सीता राम।
दससीस बिनासन बीस भुजा। कृत दूरी महा महि भूरी रुजा॥
रजनीचर बृंद पतंग रहे। सर पावक तेज प्रचंड दहे॥
राजा राम, राजा राम...
महि मंडल मंडन चारुतरं। धृत सायक चाप निषंग बरं॥
मद मोह महा ममता रजनी। तम पुंज दिवाकर तेज अनी॥
राजा राम, राजा राम...
मनजात किरात निपात किए। मृग लोग कुभोग सरेन हिए॥
हति नाथ अनाथनि पाहि हरे। बिषया बन पावँर भूली परे॥
राजा राम, राजा राम...
बहु रोग बियोगन्हि लोग हए। भवदंघ्री निरादर के फल ए॥
भव सिन्धु अगाध परे नर ते। पद पंकज प्रेम न जे करते॥
राजा राम, राजा राम...
अति दीन मलीन दुखी नितहीं। जिन्ह के पद पंकज प्रीती नहीं॥
अवलंब भवंत कथा जिन्ह के। प्रिय संत अनंत सदा तिन्ह के॥
राजा राम, राजा राम...
नहीं राग न लोभ न मान मदा। तिन्ह के सम बैभव वा बिपदा॥
एहि ते तव सेवक होत मुदा। मुनि त्यागत जोग भरोस सदा॥
राजा राम, राजा राम...
करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ। पड़ पंकज सेवत सुद्ध हिएँ॥
सम मानि निरादर आदरही। सब संत सुखी बिचरंति मही॥
राजा राम, राजा राम...
मुनि मानस पंकज भृंग भजे। रघुबीर महा रंधीर अजे॥
तव नाम जपामि नमामि हरी। भव रोग महागद मान अरी॥
राजा राम, राजा राम...
गुण सील कृपा परमायतनं। प्रणमामि निरंतर श्रीरमनं॥
रघुनंद निकंदय द्वंद्वघनं। महिपाल बिलोकय दीन जनं॥
राजा राम, राजा राम...
॥ दोहा: ॥
बार बार बर मागऊँ हरषी देहु श्रीरंग।
पद सरोज अनपायनी भगति सदा सतसंग॥
बरनि उमापति राम गुन हरषि गए कैलास।
तब प्रभु कपिन्ह दिवाए सब बिधि सुखप्रद बास॥
जानिए क्या होती है मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा
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प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ है 'जीवन शक्ति की स्थापना' या 'देवता को जीवन में लाना'। और यह एक अनुष्ठान है जो एक देवता को एक मूर्ति में आह्वान करने, उसे एक पवित्र और दिव्य इकाई में बदलने के लिए किया जाता है। एक बार जब प्राण प्रतिष्ठा पूरी हो जाती है, तो मूर्ति एक देवता में बदल जाती है जो प्रार्थना स्वीकार कर सकती है और उपासकों को आशीर्वाद दे सकती है।
Ram Mandir Live Lord Rama Mantra: प्रभु राम के चमत्कारी मंत्र से करें आराधना
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Ayodhya Ram Mandir Pran Pratishtha Ceremony: अब से कुछ घंटों बाद राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त आएगा और प्रभु राम अपने भव्य मंदिर में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद देंगे। रामलला की मूर्ति की प्रतिष्ठा के शुभ मौके पर भगवान राम के शक्तिशाली और चमत्कारी मंत्रों का जाप करना बहुत ही शुभ साबित होगा।
सर्वार्थसिद्धि भगवान राम ध्यान मंत्र
ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम,
लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम,
श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः।।
संकट में सहायता के लिए मंत्र
लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्।।
ग्रह क्लेश निवारण और सुख संपत्ति दायक मंत्र
हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा।
गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा॥
हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते।
बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम्॥
प्रतिदिन प्रभु का स्मरण करने के लिए मंत्र
|| श्री राम जय राम जय जय राम ||
मनोकामना पूर्ति हेतु मंत्र
|| श्री रामचन्द्राय नमः ||
विपत्ति में रक्षा हेतु मंत्र
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने।।
मुक्ति और प्रभु प्रेम हेतु मंत्र
नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।
लोचन निजपद जंत्रित जाहि प्राण केहि बाट।।
Ram Mandir Pran Pratishtha Live: प्राण प्रतिष्ठा के लिए 22 जनवरी का मुहूर्त ही क्यों?
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दैदिक ज्योतिष शास्त्र के विद्वानों के द्वारा राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लिए 22 जनवरी का दिन तय किया है। हिंदू पंचांग के अनुसार रामलला की मूर्ति को प्राण प्रतिष्ठा देने के लिए 22 जनवरी' 2024 पौस माह के द्वादशी तिथि को अभिजीत मुहूर्त, इंद्र योग, मृगशिरा नक्षत्र, मेष लग्न एवं वृश्चिक नवांश को चुना गया है जो दिन के 12 बजकर 29 मिनट और 08 सेकंड से 12 बजकर 30 मिनट और 32 सेकंड तक अर्थात 84 सेकंड का होगा। इसी समय में प्रभु श्रीराम की मूर्ति को प्राण प्रतिष्ठा दी जाएगी।
इस वक्त अयोध्या के आकाश में मेष लग्न का उदय हो रहा है, जो 12 बजकर 45 मिनट तक चलने वाला है। मेष लग्न में धर्म और दुनिया के सारे मंदिरों के अधिष्ठाता और शुभ मांगलिक प्रसंग के रचयिता, देवों के आचार्य बृहस्पति का उदय हो रहा है मतलब लग्न में ही गुरु बैठा है और वो गुरु उच्च नवांश में एकदम बलवान हैं। गुरु ग्रह खुद नवम स्थान और बारहवें स्थान का मालिक हैं, मतलब धर्म स्थान और मोक्ष स्थान के मालिक हैं। ईश्वर की इच्छा के बिना ऐसा मुहूर्त नहीं निकलता है।
Ram Pran Pratishtha Live And Ram Aarti: भगवान राम की आरती
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22 जनवरी दोपहर को अभिजीत मुहूर्त और मृगशिरा नक्षत्र में अयोध्या में भव्य मंदिर में राम लला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। विधि-विधान के साथ रामलला की पूजन और भोग अर्पित किया जाएगा। फिर इसके बाद भगवान राम की आरती की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बिना आरती के कोई भी पूजा पूरी नहीं होती है। अयोध्या के अलावा पूरे देशभर में भगवान श्रीराम की विशेष पूजा आराधना, सुंदराकांड का पाठ, भजन-कीर्तन और आरती की जाएगी। आइए पढ़ते हैं प्रभु राम की आरती...
Sri Ram Aarti Lyrics: भगवान श्री राम की आरती
- श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
- नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।
- कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
- पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।
- भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
- रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।
- सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
- आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।
- इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
- मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।
छंद
- मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
- करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।
- एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
- तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।
।।सोरठा।।
जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।
प्रभु राम की दूसरी आरती
- आरती कीजै श्री रघुवर जी की,
- सत चित आनन्द शिव सुन्दर की॥
- दशरथ तनय कौशल्या नन्दन,
- सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन॥
- अनुगत भक्त भक्त उर चन्दन,
- मर्यादा पुरुषोत्तम वर की॥
- निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि,
- सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि॥
- हरण शोक-भय दायक नव निधि,
- माया रहित दिव्य नर वर की॥
- जानकी पति सुर अधिपति जगपति,
- अखिल लोक पालक त्रिलोक गति॥
- विश्व वन्द्य अवन्ह अमित गति,
- एक मात्र गति सचराचर की॥
- शरणागत वत्सल व्रतधारी,
- भक्त कल्प तरुवर असुरारी॥
- नाम लेत जग पावनकारी,
- वानर सखा दीन दुख हर की॥
Ram Mandir Inauguration Time Live: जानिए कैसी है प्रभु राम की वंशावली
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अब से कुछ ही घंटों के इंतजार के बाद राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान आरंभ होगा। करीब 500 वर्षों की तपस्या के बाद राम मंदिर में राम लला विराजमान होंगे। मंत्रोचार और वैदिक रीति-रिवाजों से राम मंदिर में प्रभु राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रेया युग में भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था। भगवान राम को विष्णु का 7वां अवतार माना जाता है। कहा जाता है कि भगवान राम का जन्म सूर्यवंश में हुआ था। प्रभु राम के वंशावली के लिए जानने के लिए यहां पढ़ें-
श्रीराम की वंशावली
Ayodhya Ram Mandir Live: क्यों जरूरी है राम मंदिर के रामलला मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा ?
अब से कुछ पलो के बाद सभी राम भक्तों की इच्छाएं पूरी होने वाली है। दोपहर अभिजीत मुहूर्त में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान आरंभ हो जाएगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मूर्ति के दर्शन और पूजा-पाठ करने से पहले प्राण प्रतिष्ठा क्यों जरूरी माना गया है? हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार किसी भी मंदिर में देवी-देवता की मूर्ति स्थापित करने से पहले उस मूर्ति की विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा की जानी जरूरी होती है। प्राण प्रतिष्ठा का मतलब उस मूर्ति में प्राण की स्थापना करना यानी जीवन शक्ति को स्थापित करके मूर्ति को देवता के रूप में बदला जाता है। मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा के लिए वैदिक मंत्रों के उच्चारण और अनेकों तरह की पूजा विधियों के द्वारा उस मूर्ति में प्राण को स्थापित किया जाता है। इसी वैदिक परंपरा को प्राण प्रतिष्ठा कहते हैं। मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद मूर्ति में भक्तों की प्रार्थना स्वीकार करने वरदान देने की शक्ति आ जाती है। किसी भी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के कई चरण होते हैं, जिसे पूरा करके मूर्ति को स्थापित किया जाता है। प्राण प्रतिष्ठा के विभिन्न चरणों को अधिवास कहा जाता है। जैसे जलाधिवास, अन्नाधिवास, फलाधिवास, धृताधिवास आदि। मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का वर्णन कई पुराणों और धर्म गंथ्रों में किया गया है।
Ram Mandir Pran Pratishtha Live: श्रीरामचरित मानस की चौपाइयां और उनका अर्थ
आज पूरा देश राममय है और हो भी क्यों न। क्योंकि 22 जनवरी 2024 को वर्षों के बाद अयोध्या में भगवान राम के बाल स्वरूप राम लला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का धार्मिक अनुष्ठान किया जा रहा है। इस मौके पर देशभर के सभी मंदिरों और घरों में भगवान राम की विशेष रूप से पूजा आराधना का कार्यक्रम चल रहा है। भगवान राम की पूजा रामायण और रामचरित मानस के पाठ के बिना अधूरा माना जाता है। रामचारित की चौपाइयों में प्रभु राम के जीवन से संबंधित की बातों को उल्लेख किया गया है। ऐसे में रामचारित मानस का पाठ अवश्य करना चाहिए। क्योंकि रामचारित मानस की चौपाइयों में हर परेशानियों का हल बताया गया है। पढ़ें
रामचरित मानस की कुछ चौपाईयां...
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से जुड़ा विशेष कवरेज यहां पढ़ें
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आज प्रभु राम की जन्मस्थली अयोध्या में रामलला मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। जिसके बाद अयोध्या का राम मंदिर सभी के आर्कषण और आस्था का केंद्र रहेगा। भगवान राम अपने जीवन में वे जहां-जहां गए वहां कोई न कोई मंदिर जरूर है। अयोध्या, चित्रकूट और रामेश्वरम के अलावा की मंदिर हैं जहां प्रभु राम का संबंध है।
भगवान राम के प्राचीन मंदिर
-अयोध्या (उत्तर प्रदेश)
- चित्रकूट (उत्तर प्रदेश)
-रामेश्वरम (उत्तर प्रदेश)
-त्रिप्रायर राम मंदिर( केरल)
-काला राम मंदिर( महाराष्ट्र)
- सीता रामचंद्रस्वामी मंदिर (तेलंगाना)
- रामटेक मंदिर (महाराष्ट्र)
-रामास्वामी मंदिर(तमिलनाडू)
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से जुड़ा विशेष कवरेज यहां पढ़ें
Ram Mandir Pran Pratishtha Live: प्रभु श्रीराम को प्रसन्न करने का अचूक उपाय है राम रक्षा स्रोत का पाठ
भगवान श्रीराम की उपासना करने के लिए श्रीराम रक्षा स्त्रोत का पाठ करना पुण्यदायक और लाभदायक सिद्ध होगा। श्रीराम रक्षा स्त्रोत में भगवान श्रीराम की महिमा का गुणगान किया गया है । मान्यता है कि श्रीराम रक्षा स्त्रोत का पाठ करने से भगवान श्रीराम भक्तों के सभी कष्टों को दूर कर देते हैं,उनकी सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। श्रीराम रक्षा स्त्रोत का पाठ एक ऐसा अमोघ कवच है जिससे कोई भी शत्रु उसका बाल भी बांका नहीं कर सकता है। इस स्तोत्र का पाठ करने वालों का श्रीराम द्वारा रक्षण होता है।
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा और शनि ग्रह का संयोग
आज बहुत ही शुभ संयोग और मुहूर्त में अयोध्या राम मंदिर में भगवान राम के बाल रूप की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान है। अगर ग्रहों की बात करें तो आज गुरु के ऊपर बहुत ही बलवान शनि की दृष्टि भी पड़ रही है। शनि और गुरु नवांश कुंडली में भी प्रबल होकर आमने-सामने बैठे हैं। इन दोनों का जब भी संबंध होता है तो ब्रह्मांड में आध्यात्मिक चेतना अपनी उच्च सीमा पर रहती है। शनि भी इस कुंडली में कर्म स्थान का और लाभ स्थान का अधिपति भी बन रहा है। शनि की कृपा के बिना इतना बड़ा प्रसंग कभी नहीं बनता क्योंकि शनि मोक्ष स्थान का कारक भी हैं, ईश्वर के साक्षात्कार का ग्रह भी है और न्याय का देवता भी है।
Ram Mandir Pran Pratishtha Live: रामरक्षास्त्रोत का महत्व
रामरक्षास्त्रोत एक रक्षा कवच है। इसका पाठ करने से मनुष्य भय रहित हो जाता है। इसके नित्य पाठ से कष्ट दूर होते हैं। जो इसका रोज़ाना पाठ करता है वह दीर्घायु, सुखी, संततिवान, विजयी और विनय संपन्न होता है। इसके शुभ प्रभाव से व्यक्ति के चारों और सुरक्षा कवच बनता है, जिससे हर प्रकार की विपत्ति से रक्षा होती है। कहा जाता है इसके पाठ से भगवान राम के साथ पवनपुत्र हनुमान भी प्रसन्न होते हैं। संतान प्राप्ति एवं धन लाभ की इच्छा रखने वाले लोग भी नियमित रूप से इसका पाठ करें।
रामरक्षास्त्रोत पाठ करने के नियम
ऐसी मान्यता है कि यदि आप किसी मनोकामना की पूर्ति हेतु राम रक्षा स्त्रोत्र का पाठ कर रहे हैं तो इसे दिन में 11 बार करें और 41 दिनों तक नियमित रूप से इस पाठ का जाप करें। इस स्तोत्र का जाप करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। पाठ करते समय मन में प्रभु श्री राम का ध्यान रखते हुए सभी विकारों से दूर रहें।पाठ करते समय साफ़ सात्विक रंग के धुले हुए वस्त्र धारण करें।
Ram Mandir Pran Pratishtha Live: अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा कुछ ही देर बाद होगा शुरू
अब से कुछ देर बाद दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य अनुष्ठान विधि शुरू होगी। प्राण प्रतिष्ठा के लिए 84 सेकंड का शुभ मुहूर्त बहुत खास रहेगा।
रामलला की मूर्ति की आंखों में क्यों बांधी गई है पट्टी
12 बजकर 29 मिनट पर विशेष शुभ मुहूर्त में रामलला मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। प्राण प्रतिष्ठा से पहले रामलला की आंखों में पट्टी बंधी हुई और 84 सेकंड के शुभ मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामलला की आंखों से पट्टी खोली जाएगी। हिंदू धर्म में किसी भी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा से पहले आंखों पर पट्टी बांधना जरूरी है क्योंकि भगवान की मूर्ति में आंखें सबसे खास होती है इसी कारण से प्राण-प्रतिष्ठा के बाद आंखों से पट्टी खोली जाती है।
Ram Mandir Pran Pratishtha Live: रामलला मंदिर के गर्भगृह में प्रधानमंत्री मोदी मौजूद
इस समय प्राण प्रतिष्ठा के दौरान राम मंदिर के गर्भगृह में प्रधानमंत्री मोदी समेत 5 लोग मौजूद हैं। प्रधानमंत्री मोदी प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान का संकल्प ले रहे हैं।
Ram Mandir Pran Pratishtha Live:क्या होती है प्राण प्रतिष्ठा
आज 84 सेकंड में रामलला की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा होगी। प्राण प्रतिष्ठा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। प्राण प्रतिष्ठा का मतलब मूर्ति में जीवन लाना होता है। इस अनुष्ठान में देवता के मूर्ति को मंत्रोचार के जारिए देवता का आह्नान किया जाता है। फिर मूर्ति में देवता विराजमान होते हैं।
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प्रभु राम के करें दर्शन
Ram Mandir Pran Pratishtha Live:राम मंदिर में विराजे रामलला
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राम मंदिर में विराजे रामलला.... यहां करें दर्शन
अभिजीत मुहूर्त में हुई प्राण प्रतिष्ठा
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आज हो गए हैं अयोध्यावासी...जो थे वनवासी... ठाठ से विराजे अवध बिहारी
अवध में विराजे रामलला प्रभु राम
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प्राण प्रतिष्ठा में प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने प्रभु राम लला के चरणों मेंं अर्पित किया कमल का फूल
अयोध्या के राममंदिर में विराजमान हुए प्रभु राम लला
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मोहक मुस्कान,श्यामवर्ण और आलौकिक रूप में अयोध्या के राममंदिर में विराजमान हुए प्रभु राम लला
रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का विधान पूरा -- करें प्रभु राम के दर्शन
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अयोध्या के राम मंदिर में प्रभु राम के बाल स्वरूप रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का विधान पूरा हो गया है।
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अवध में विराजे राम लला... सारे जग में उल्लास का वातावरण
500 वर्षों का इंतजार खत्म, अयोध्या में विराजे रामलला
पीएम मोदी ने रामलला को किया साष्टांग प्रणाम
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प्रधानमंत्री मोदी ने रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की पूजा शामिल हुए और आरती की। पीएम मोदी ने प्रभु राम के सामने साष्टांग प्रणाम किया।