संतों और धर्माचार्यों को साथ लेकर ब्रह्नलीन महंत अवेद्यनाथ ने 21 जुलाई, 1984 को अयोध्या के वाल्मीकि भवन में श्रीराम जन्मभूमि यज्ञ संघर्ष समिति का गठन किया। इसके अध्यक्ष गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ और महामंत्री दाऊदयाल खन्ना को बनाया गया। 7 अक्तूबर 1984 काे विहिप ने सरयू तट पर श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति का संकल्प लिया और अगले दिन इस मसले पर जनजागरण के उद्देश्य से पदयात्रा शुरू की।
विश्व हिंदू परिषद के जिला संगठन मंत्री बृजेश राम त्रिपाठी बजरंगी कहते हैं- 1986 में अयोध्या में विवादित स्थल का ताला खुलवाने और उसके पहले हुए घटनाक्रम में प्रमुख भूमिका निभाने वाले महंत अवेद्यनाथ का हर काम मंदिर आंदोलन से जुड़ा होता था। वह एक ऐसे संत थे, जो मंदिर आंदोलन के साथ-साथ हिंदुओं में व्याप्त जातिवाद पर भी कड़ा प्रहार करते थे। संतों-धर्माचार्यों को जोड़कर धर्म संसद का आयोजन कराया, जिसका संदेश पूरे पूर्वांचल में गया। लोग स्वत: इस आंदोलन से जुड़ने लगे। घर-घर से निकले नौजवानों के जत्थे ने बजरंगी बनकर कारसेवा की।