खाना बनाने सेंट्रल जेल से रोज आते हैं कैदी
घूघरा जेल में इस समय 82 कुख्यात कैदी बंद हैं। इन्हें जेल परिसर में घूमने, एक दूसरे मिलने या फिर बात करने की भी इजाजत नहीं है। सुरक्षा के इंतजाम ऐसे है कि सेंट्रल जेल से 14 कैदी यहां खाना बनाने और साफ-सफाई सहित अन्य कामों के लिए रोजाना आते हैं। इस तरह की कड़ी सुरक्षा के बीच कन्हैयालाल के हत्यारों रियाज और गौस मोहम्मद को रखा गया है।
अलग-अलग कोठरी में बंद हैं दोनों हत्यारे
कन्हैयालाल की बेहरमी से हत्या करने वाले दोनों हत्यारों को अलग-अलग कोठरी में रखा गया है। बताया जा रहा है कि दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए। उनका मेडिकल भी जेल में ही कराया जाएगा। एटीएस और एनआईए जेल में ही दोनों हत्यारों से पूछताछ कर सकती है।
जांच में सामने आए अब तक के बड़े अपडेट
- हत्यारों का संबंध मुंबई आतंकी हमले से भी जुड़ता नजर आ रहा है। कन्हैया की हत्या के बाद हत्यारे जिस बाइक से भाग रहे थे, उसका नंबर 2611 है। यह मुंबई आंतकी हमले की तारीख भी है। आरोपी रियाज ने 2013 में एक पल्सर बाइक खरीदी थी। जिसका नंबर आरजे 27 एस 2611 है। 2611 नंबर लेने के लिए उसने आरटीओ को पांच हजार रुपये का अतरिक्त भुगतान भी किया था। ऐसे में अब सवाल खड़ा हो गया है कि यह नंबर लेने के पीछे आरोपी की मानसिकता क्या है? जांच एजेंसियां इस सवाल का जवाब तलाश रही हैं।
- आरोपी गौस मोहम्मद आतंकी सलमान हैदर और अबू इब्राहिम के संपर्क में था। यह दोनों पाकिस्तान में बैठकर आंतक फैलाने का काम करते हैं। गौस मोहम्मद ने ही रियाज अत्तारी को कट्टरपंथी बनने के लिए उकसाया था। साथ ही ब्रेनवॉश कर अपनी टीम में शामिल कर लिया। हत्यारे गौस को आतंकी सलमान हैदर ने कट्टरपंथी बनने की ट्रेनिंग दी थी। सलमान ने ही उसका संपर्क अबू इब्राहिम से कराया था।
- आरोपी रियाज और गौस पाकिस्तान के कराची गए थे। 2014-15 में दोनों ने वहां 15 दिन की ट्रेनिंग ली थी। हत्यारे पाकिस्तान में दावत-ए-इस्लामी संगठन से भी जुड़े हुए थे। कराची से आने के बाद दोनों आरोपी अपने समाज के युवाओं को धर्म के प्रति कट्टरपंथी बना रहे थे। उन्होंने एक व्हाट्स ग्रुप भी बनाया था जिसमें भड़काऊ वीडियो और मैसेज भेजकर युवाओं का ब्रेनवॉश किया जा रहा था। पाकिस्तान के कुछ मोबाइल नंबरों पर दोनों की लगातार बात हो रही थी।
- रियाज और गौस के अलसूफा से भी जुड़े होने की बात सामने आई थी। यह संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के रिमोट स्लीपर सेल के तौर पर काम करता है। रियाज पिछले पांच साल से अलसूफा के लिए राजस्थान के आठ जिलों में स्लीपर सेल बना रहा था। दोनों उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, राजसमंद, टोंक, बूंदी, बांसवाड़ा और जोधपुर में बेरोजगार युवाओं का ब्रेनवॉश कर आईएसआईएस के स्लीपर सेल से जोड़ रहे थे। दोनों को अरब देशों से फंडिग भी मिली थी।