राजस्थान के बूंदी में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म और फिर उसकी हत्या करने वाले दो दोषियों को फांसी की सजा सुना दी गई। शुक्रवार को जिले की पोक्सो कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। तीसरे नाबालिग आरोपी का केस बाल न्यायालय में चल रहा है।
15 साल की नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने वाले किसी दरिंदे से कम नहीं हैं। उन्होंने नाबालिग की हत्या करने के बाद उसकी लाश से भी दुष्कर्म किया था। यही नहीं हत्या से पहले इन दरिंदों ने पीड़िता के साथ मारपीट की, दांतों से कई जगह काटा, नाखूनों से नोंचा और फिर उसी की चुन्नी से गला घोंटकर मार डाला।
इस दिल दहला देने वाली वारदात को अंजाम देने वाले सुल्तान भील और छोटू लाल को न्यायधीश बाल कृष्ण मिश्र ने फांसी की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सजा सुनाते हुए मिश्र ने कहा कि यह एक जघन्य हत्याकांड है। इस पूरे प्रकरण में शामिल नाबालिग आरोपी का केस बाल न्यायालय में चल रहा है।
क्या है मामला
23 दिसंबर 2021 को बूंदी के बसोली थाना इलाके के जंगल में 15 साल की नाबालिग बकरियां चराने गई। इस दौरान सुल्तान भील (27) और छोटू लाल (62) ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी। इससे पहले दरिंदों ने मासूम को दांतों से कई जगह काटा, नाखूनों से नोंचा और फिर चुन्नी से गला दबाकर मार डाला। इसके बाद भी दोनों उसके साथ दुष्कर्म करते रहे।
12 घंटे में पकड़े गए थे आरोपी
बूंदी पुलिस अधीक्षक जय यादव ने बताया कि 23 दिसंबर को घने जंगलों में एक नग्न नाबालिक बालिका की लाश मिली थी। जांच के लिए सबूत जुटाने कोटा से विधि विज्ञान प्रयोगशाला के विशेषज्ञों और डॉग स्कॉड को बुलाया गया। जंगल को सील कर 10 थाना अधिकारियों, 200 पुलिस जवानों और डॉग स्कॉड के साथ सर्च अभियान चलाया गया। 12 घंटे बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पकड़े गए तीनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल किया, लेकिन इनमें से एक आरोपी 17 साल का नाबालिग था।
100 पंन्नों में दर्ज दरिंदगी की वारदात
15 साल की नाबालिग के साथ हुई इस वारदात ने लोगों को हिला कर रख दिया था। गंभीरता को पुलिस ने सिर्फ 14 दिन में कोर्ट में चालान पेश कर दिया था। पुलिस ने 100 पन्नों में दरिंदगी की पूरी वारदात लिखी थी।
मुख्यमंत्री बोले- यह प्रदेश का ऐसा पहला मामला
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दुष्कर्म के आरोपियों को फांसी की सजा देने के मामले में सरकार की नीतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस केस में प्रदेश सरकार ने विशेष वकील की नियुक्ति की थी। केस ऑफिसर स्कीम के तहत 3 कार्यदिवस में पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश कर दिया था। यह प्रदेश में पोक्सो एक्ट का पहला मामला है जिसमें दो दोषियों को एक साथ फांसी की सजा सुनाई गई है।
उन्होंने कहा कि हर राज्य से ऐसी खबरें लगातार आती रहती हैं, जो देश के लिए चिंता का विषय हैं। इसे ध्यान में रखकर सरकार ने प्रदेश में कई नवाचार किए। सबसे पहले हर अपराध की एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य किया गया। महिला अपराधों की जांच के लिए एडिशनल एसपी के नेतृत्व में अलग सैल बनाई गई। फॉरेंसिक लैब की संख्या बढ़ाई और लीगल ऑफिसर्स की नियुक्ति भी की गई है।
इन सभी नवाचारों के कारण प्रदेश में हर पीड़िता को न्याय सुनिश्चित हो पा रहा है। हमारी सरकार आने के बाद पोक्सो एक्ट के मामलों में आइ दोषियों को फांसी, 137 से अधिक को आजीवन कारावास समेत कुल 620 से अधिक दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है। प्रदेश सरकार महिला सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। महिला अपराधों के किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।