अस्पताल के बाहर जमीन पर बैठक मरीजाें को दी गई दवा।
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रोहिड़ा के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों ने मरीजों की जांच व उपचार अस्पताल से बाहर पेड़ के नीचे बैठकर किया। अस्पताल में इस तरह के हालात इसलिए बने क्योंकि यहां पिछले चार दिन से एक युवक का शव मोर्चरी में पड़ा हुआ है। दुर्गंध के कारण डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ परेशान हो रहा है। पड़े के नीचे मरीजों का इलाज किया गया तो पुलिसकर्मियों ने डॉक्टरों को समझाइश दी, लेकिन दुर्गंध के कारण चिकित्सक अंदर जाने के लिए तैयार नहीं हुए। मामला सोमवार का है, अब शव का पीएम कराकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार 26 मार्च को भुला मार्ग पर सवारी टेंपो पलटने से नवा वास निवासी मेलियाराम पुत्र लुटकाराम गमेती गम्भीर रूप से घायल हो गया था। सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उसे सिरोही रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान एक अप्रैल को उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मृतक के शव को रोहिड़ा के अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया था। चार दिन से शव मोर्चरी में रखे होने से अस्पताल परिसर में दुर्गंध फैल गई। इससे परेशान डॉक्टरों ने अस्पताल परिसर से बाहर पेड़ के नीचे मरिजो की जांच कर इलाज किया। इस मौके पर चिकित्सा प्रभारी डॉ अर्जुन मोदी, डॉ भानु प्रताप, मेल नर्स फस्ट मूलसिंह , प्रतापसिह सहित एएनएम और अन्य अस्पताल स्टाफ मौजूद रहा।
एक अप्रैल को रखा था शव
चिकित्सा प्रभारी डॉ. अर्जुन मोदी ने बताया कि अस्पताल के पोस्टमॉर्टम रूम में एक अप्रैल को करीब शाम चार बजे शव बिना सूचना दिए रख दिया गया था। चार अप्रैल तक पुलिस की ओर से पोटमोर्टम के लिए कोई तेहरीर नहीं दी गई थी। पीएम नहीं होने के कारण से अस्पताल परिसर में दुर्गंध फैल गई। बैठना तक संभव नहीं हो रहा है। पुलिस प्रशासन से बार-बार कहने के बाद भी इसका निस्तारण नहीं हो पाया।
मुआवजा मिलने के बाद पीएम को राजी हुए परिजन
भुला रोड पर 26 मार्च को सवारी टेंपो पलटने से घायल नवावास खालसा निवासी मेलीयाराम पुत्र लुटकाराम की उपचार के दौरान एक अप्रैल को मौत हो गई थी। मौताणे की मांग को लेकर शव चार दिन से रोहिड़ा अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ था। सोमवार दोपहर को मुआवजा मिलने के बाद परिजन पीएम के लिए राजी हुए।