राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व प्रभाव से निर्धारित अंतरिम भरण-पोषण की वसूली के लिए 12 महीने की सीमा अवधि आदेश पारित होने की तारीख से गिनी जाएगी। न्यायमूर्ति फरजंद अली की पीठ ने पति की याचिका खारिज कर दी।
राजस्थान हाईकोर्ट ने भरण-पोषण के बकाये की वसूली को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125(3) के तहत पूर्व प्रभाव से अंतरिम भरण-पोषण का आदेश दिए जाने पर वसूली के लिए 12 महीने की सीमा अवधि की गणना आदेश पारित होने की तारीख से की जाएगी, न कि उन पुराने महीनों से जिनके लिए भरण-पोषण निर्धारित किया गया है। न्यायमूर्ति फरजंद अली की पीठ ने हेतराम की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। इस निर्णय से भरण-पोषण की वसूली के मामलों में महिलाओं को राहत मिली है।
अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि पत्नी ने आदेश पारित होने के बाद 27 जून 2022 को ही वसूली के लिए आवेदन कर दिया था। यानी आवेदन आदेश के एक महीने के भीतर किया गया था। ऐसे में वसूली की अर्जी निर्धारित सीमा अवधि के भीतर थी। हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज कर दी। अदालत के फैसले के अनुसार, पूर्व प्रभाव से भरण-पोषण निर्धारित किए जाने पर केवल इस आधार पर वसूली का आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता कि बकाया राशि 12 महीने से अधिक पुरानी अवधि से संबंधित है, यदि वसूली के लिए आवेदन आदेश पारित होने के बाद निर्धारित समय सीमा में किया गया हो।