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ओबीसी आयोग का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक बढ़ा: डोटासरा बोले- क्या ये जातियों को बांटने की साजिश है?

Thu, 01 Oct 2026 07:51 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान सरकार ने ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक बढ़ाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने विस्तार पर सवाल उठाते हुए सरकार से पूछा है कि इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
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ओबीसी आयोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान सरकार ने राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने 30 सितंबर को इसका आदेश जारी किया। आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश मदनलाल भाटी सहित सभी सदस्यों का कार्यकाल भी इसी अवधि तक बढ़ाया गया है।

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आयोग का गठन 9 मई 2025 को स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में ओबीसी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण से जुड़े विषयों के लिए किया गया था। आयोग ने अगस्त 2026 में स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण से संबंधित अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप दी थीं। अब आयोग के आगे के काम के लिए टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) अलग से जारी किए जाएंगे। इस आदेश के जारी होने के साथ ही प्रदेश में सियासत भी गरमाने लगी है।

डोटासरा ने उठाए सवाल

आयोग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों के लिए ओबीसी को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया जा चुका है, तो आयोग का कार्यकाल बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी।
डोटासरा ने सरकार से विस्तार के कारण और उद्देश्य स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी समाज की जातियों को आपस में बांटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे लेकर सरकार से राजस्थान के ओबीसी समाज के सामने स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

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अध्यक्ष समेत सभी सदस्यों का कार्यकाल बढ़ा

सरकार के आदेश के अनुसार अध्यक्ष मदनलाल भाटी के साथ सदस्य मोहन मोरवाल, प्रो. राजीव सक्सैना, एडवोकेट गोपाल कृष्णा और पवन मंडाविया का कार्यकाल भी 31 मार्च 2027 तक बढ़ाया गया है। इससे पहले आयोग का कार्यकाल अलग-अलग चरणों में बढ़ाया जा चुका है। मार्च 2026 में इसके कार्यकाल को 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया था।

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