कांग्रेस के लिए बागियों की चुनौती कम
भाजपा के मुकाबले इस बार कांग्रेस के लिए बागियों की चुनौती शुरूआत से ही कम दिख रही थी। इसका कारण यह भी था कि पार्टी ने कई चरणों में प्रत्याशी घोषित किए और अंत तक क्रम चलता रहा।
ये बागी मांग गए
अजमेर दक्षिण से हेमंत भाटी, मसूदा से पूर्व संसदीय सचिव ब्रहम्देव कुमावत, बडी सादडी से पूर्व विधायक प्रकाश चैधरी, चैरासी से महेन्द बरजोड, छबडा से नरेश मीणा।
ये सीटें रह गईं फंसी
कंग्रेस के लिए वैसे तो 16 सीटों पर बागियों की चुनौती दिख रही है, लेकिन प्रमुख बागियों ये नेता ही मैदान में दिख रहे हैं...।
- बसेड़ी: खिलाडी लाल बैरवा मौजूदा विधायक और अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। मुखर बयानबाजी का शिकार हुए और टिकट कट गया। अब बसेड़ी से पार्टी के प्रत्याशी संजय जाटव के लिए मुसीबत बन सकते हैं।
- राजगढ लक्ष्मणगढ़: जौहरी लाल मीणा मौजूदा विधायक हैं। बेटे पर दुष्कर्म के कथित आरोप लगे हैं। टिकट कट गया तो बागी बनकर चुनाव मैदान में उतर गए। यहां से कांग्रेस ने मांगे लाल मीणा को टिकट दिया है।
- सिवाना: सुनील परिहार को सीएम अशोक गहलोत के करीबियों में गिना जाता है। पार्टी ने चुनाव में एक अहम जिम्मेदारी दे दी, लेकिन टिकट नहीं दिया। इससे नाराज होकर चुनाव मैदान में उतर आए। अब पार्टी प्रत्याशी मानवेन्द्र सिंह के लिए परेशानी का कारण बनते दिख रहे हैं।
- शाहपुरा: जयपुर जिले की इस सीट से आलोक बेनीवाल निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री कमला बेनीवाल के बेटे हैं। पिछली बार टिकट कटा तो निर्दलीय विधायक बन गए। इस बार कई निर्दलीयों को पार्टी का टिकट मिला, लेकिन इन्हें छोड़ दिया गया। अब पार्टी प्रत्याशी मनीष यादव के लिए चुनौती बन रहे हैं। खास बात यह है कि मनीष यादव पिछली बार भी यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी थे।
- लूणकरणसर: वीरेंद्र बेनीवाल अशोक गहलोत की पिछली सरकार में पहले सरकारी मुख्य सचेतक और फिर गृह राज्य मंत्री थे। पिछली बार टिकट मिला, लेकिन हार गए थे। इस बार नहीं दिया तो बागी हो गए। अब पार्टी प्रत्याशी राजेंद्र मूंड के लिए चुनौती बनेंगे।
- नागौर: हबीबुर्रहमान इस सीट पर कई बार कांग्रेस का चेहरा रहे हैं। भाजपा से भी ये चुनाव जीत चुके हैं। इस बार फिर कांग्रेस में है, लेकिन टिकट नहीं मिला। अब पार्टी प्रत्याशी हरेन्द्र मिर्धा के लिए चुनौती बन रहे हैं।
- पुष्कर: गोपाल बाहेती इसी सीट से विधायक रह चुके हैं और सीएम गहलोत के नजदीकियों में गिने जाते हैं। इस बार पार्टी ने यहां नसीम अख्तर इंसाफ को टिकट दिया है जो पायलट की करीबी हैं। बाहेती इंसाफ के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।