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दूसरे के आवेदन पर दो साल करती रही सरकारी नौकरी, लाखों की सैलरी उठाई, सोता रहा पूरा विभाग

Wed, 09 Dec 2020 01:24 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
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धौलपुर - फोटो : सोशल मीडिया
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राजस्थान के धौलपुर में सरकारी विभाग में की जाने वाली लापरवाही का एक और मामला सामने आया है।  नगर परिषद में एक महिला ने बिना आवेदन किए दो साल तक सफाई कर्मचारी की नौकरी की। उसने इन दो साल में करीब 2.5 लाख रुपए का वेतन उठाया। मजे की बात यह है कि विभाग के कर्मचारी और अधिकारी को इसकी भनक तक नहीं लगी और महिला नौकरी पर आती रही।

ऐसे सामने आई हकीकत

दो साल बाद जब उसको परमानेंट किया जाना था तो नगर परिषद आयुक्त सौरभ जिंदल की सतर्कता से फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद नगर परिषद ने महिला को नौकरी से निकाल दिया और नोटिस देकर पूरे पैसे वसूल किए। इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद सौरभ जिंदल ने चार सदस्य की एक टीम गठित की है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद धोखे से नौकरी करने वाली महिला मीना जाटव के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

लॉटरी प्रक्रिया के जरिए हुई थी भर्ती

दरअसल, धौलपुर में नगर परिषद में राज्य सरकार के आदेश पर सफाईकर्मियों की लॉटरी प्रक्रिया से भर्ती हुई थी। इसमें मनिया कस्बे के गांव बराबट में रहने वाली मीना पत्नी राजेश कुशवाहा ने ओबीसी कैटिगरी में विधवा कोटे से सफाई कर्मचारी के पद पर आवेदन किया था। लॉटरी में चयनित होने के बाद 14 जुलाई 2018 को आदेश क्रमांक 3003 से नियुक्ति पत्र उसके घर पर भेजा गया। लेकिन डाक विभाग की गलती से वह नियुक्ति पत्र उसी के गांव बराबट में रहने वाली मीना पत्नी राजेश जाटव के घर पहुंच गई। मीना ने सफाई कर्मचारी के लिए आवेदन नहीं किया था, लेकिन उसने नियुक्ति पत्र को ले लिया और 16 जुलाई को नगर परिषद में उसकी नियुक्ति हो  गई।

विभाग को नहीं लगी भनक

मजे की बात यह है कि नगर परिषद में तैनात किसी कर्मचारी को इस गड़बड़ी की भनक तक नहीं लगी। असली मीना पत्नी राजेश कुमार की उम्र 27 साल थी, जबकि दूसरी फर्जी मीना की उम्र 37 साल थी। असली मीना ने ओबीसी से सफाईकर्मी के पद के लिए आवेदन किया था, जिसमें उसने ओबीसी के प्रमाण-पत्र के साथ अपने पति का डेथ सर्टिफिकेट भी लगाया था। साथ ही, उसने दूसरे दस्तावेज और निवास प्रमाण पत्र भी लगाया था।
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वहीं, दूसरी फर्जी मीना ने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए पुलिस सत्यापन, चरित्र प्रमाण पत्र, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, शौचालय निर्माण प्रमाण पत्र लगाया था। इन सभी प्रमाण-पत्रों में मीना ने जाटव लिखा था। फिर भी कर्मचारी दस्तावेजों की भिन्नता को पकड़ नहीं पाए। इतना ही नहीं मूल आवेदन और बाद में लगाए गए दस्तावेजों में अलग-अलग फोटो का मिलान तक नहीं किया गया। यदि उसी समय कर्मचारियों ने ध्यान दिया होता, तो यह गड़बड़ी उसी वक्त पकड़ ली जाती।

स्थायीकरण की प्रक्रिया में पकड़ा गया फर्जीवाड़ा

नगर परिषद में साल 2018 में भर्ती हुए सफाईकर्मचारियों को दो साल के बाद सितंबर 2020 में परमानेंट किया जाना था। पहले तो नगर परिषद अधिकारी और कर्मचारियों ने एक साथ ही परमानेंट करने के लिए डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की बात कही, लेकिन नगर परिषद आयुक्त सौरभ जिंदल ने इससे मना कर दिया और सभी के दस्तावेजों को फिर से जांच करने के बाद ही परमानेंट करने के आदेश दिए। इसके बाद सफाईकर्मियों की जांच की गई और सभी से ओरिजनल डॉक्यूमेंट्स मंगाए गए।

इसी तरह फर्जी दूसरी मीना से भी दस्तावेज मंगाए गए तो उसका पति राजेश सभी डॉक्यूमेंट्स को लेकर नगर परिषद के ऑफिस पहुंचा। जब डॉक्यूमेंट्स मिलाए गए तो खुलासा हुआ कि नियुक्ति गलत तरीके से हुई है। इसके बाद फर्जी मीना को नौकरी से निकाल दिया गया और उसे एक नोटिस दिया गया, जिसमें उसके ऊपर कानूनी कर्रवाई करने की बात कही गई।  
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