राजस्थान में वोटरों ने पिछले सभी रिकॉर्ड को तोड़ते हुए जमकर मतदान किया। रविवार को 200 में से 199 विधानसभा सीटों पर 74.38 फीसदी मतदान हुआ।
मतदान के साथ ही 2096 उम्मीदवारों के भाग्य ईवीएम में कैद हो गए हैं। फैसला 8 दिसंबर को होगा। बसपा उम्मीदवार की मृत्यु हो जाने के कारण चुरू विधानसभा सीट पर रविवार को मतदान स्थगित कर दिया था, अब यहां 13 दिसंबर को मतदान होगा।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जहां मोदी फैक्टर को फेल बताकर कांग्रेस की जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं भाजपा की सीएम पद की दावेदार वसुंधरा राजे को भरोसा है कि आठ दिसंबर को नतीजे उनके पक्ष में रहेंगे।
राजस्थान में सर्वाधिक मतदान वर्ष 1993 में हुआ था, जो 68.59 फीसदी रहा था। वर्ष 2008 में राजस्थान विधानसभा चुनाव में कुल 66.25 प्रतिशत मतदान हुआ था और कांग्रेस को 96, भाजपा को 78 और निर्दलीय व अन्य दलों को 26 सीटें मिली थीं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक जैन के अनुसार पूरे प्रदेश में कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़ मतदान लगभग शांतिपूर्ण रहा। असामान्य हालातों के कारण कुछ बूथों पर मतदान कुछ मिनटों से लेकर 1 घंटे तक प्रभावित रहा। किसी बूथ पर फिर से मतदान को लेकर अभी फैसला नहीं लिया गया है।
सवाईमाधोपुर, झुंझुनूं, बीकानेर, भरतपुर, अजमेर, जोधपुर जिलों के कुछ बूथों पर निर्वाचन विभाग को फर्जी मतदान की शिकायतें मिली, कुछ पर प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं।
वहीं अलवर के जामडोली में एक बूथ पर जवानों को हवाई फायर कर उपद्रवियों को भगाया गया तथा राजगढ़ में दो गुटों में झड़प हो गई, जिसमें 2 घायल हो गए।
राजस्थान विधानसभा चुनाव में 140 सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है, लेकिन 60 सीटों पर राजपा जैसी पार्टी के उम्मीदवार या निर्दलीय के रूप में खड़े हुए बागी समीकरण बिगाड़ रहे हैं। दो दर्जन सीटों पर तो बागियों व अन्य पार्टियों की स्थिति भी मजबूत कही जा सकती है।