शहीद मेजर विकास का 2008 में सेना में चयन हुआ था। ट्रेनिंग के बाद 2012 में उन्होंने सर्विस जॉइन की थी। 3 साल में ही विकास आर्मी की फ्लाइंग विंग में शामिल हो गए थे। बाद में उन्हें मेजर बनया गया था। विकास सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान आर्मी की स्टैंडबाई टीम में भी शामिल थे।
अरुणाचल प्रदेश में शुक्रवार को हुए हेलिकॉप्टर क्रैश में हनुमानगढ़ के टिब्बी के रामपुरा गांव के मेजर विकास भांबू शहीद हो गए। शहादत की खबर सुन उनकी पत्नी श्रेया और मां बेसुध हो गईं। जिले के रामपुरा गांव में शहीद का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। शहीद का पूरा परिवार जयपुर में रहता है। शहीद मेजर विकास अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे।
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अधिवक्ता सुखवीर भांबू ने बताया कि मेजर विकास मेरे चाचा का इकलौता बेटा था। उनकी दो बहनें हैं और दोनों की शादी हो चुकी है। मेजर विकास की शादी श्रीगंगानगर जिले की सरदारपुरा गांव से हुई थी। शहीद की पत्नी श्रेया चौधरी का परिवार जयपुर में ही रहता है। दोनों की एक बेटी भी है। शहीद मेजर विकास भांबू अपने पैतृक गांव पिछले महीने ही आए थे। रामसरा उर्फ रामपुरा गांव में विकास के चाचा-ताऊ का परिवार रहता है।
शहीद विकास के पिता पूर्व कैबिनेट मंत्री सुभाष महरिया के पीए रह चुके हैं। उनके पिता का अक्सर जयपुर-सीकर आना जाना रहता था। जिसके बाद वह अपने परिवार के साथ जयपुर में ही रहने लगे। सुखवीर ने बताया कि शहीद विकास सबसे ज्यादा अपनी मां के करीब थे। वह अपनी हर बात मां से शेयर करता था। मां-बेटे में बचपन से ही बहुत अधिक लगाव था। वहीं पिता भागीरथ भांबू के इकलौते बेटे होने के चलते विकास अपनी बहनों और पिता का भी लाडला था। उन्होंने बताया कि अंतिम बार गांव आए विकास ने दीपावली साथ मिलकर धूमधाम से मनाने की बात कही थी।
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सुधवीर बताते हैं कि विकास ने अपनी ज्यादातर पढ़ाई सीकर में रहकर ही पूरी की थी। वहां पढ़ाई करते समय उसका सिलेक्शन आर्मी लेफ्टिनेंट में हुआ था। उसने 2008 में देहरादून में आर्मी की ट्रेनिंग पूरी की थी। जिसके बाद 2012 में आर्मी की सर्विस जॉइन की थी। 3 साल में ही विकास आर्मी की फ्लाइंग विंग में शामिल हो गया था। अगले 2 सालों में ही वह आर्मी में मेजर बन गया था। वर्तमान में वह मेजर की पोस्ट पर ही तैनात था। विकास सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भी आर्मी की स्टैंडबाई टीम में शामिल था।