प्रमुख शासन सचिव, कृषि एवं उद्यानिकी वैभव गालरिया की अध्यक्षता में गुरुवार को पंत कृृषि भवन में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई)की बैठक राज्य के प्रमुख बैंकों के स्टेट हेड के साथ आयोजित की गई। प्रमुख शासन सचिव द्वारा बैंक अधिकारियों को इस योजना के प्रति संवेदनशील रहते हुए योजना के लक्ष्य अर्जित करने के लिए निर्देशित किया गया। उन्होंने बताया कि योजना का उद्देश्य खाद्य से संबंधित योजना में अनुदान प्रदान कर इकाइयों को बढ़ावा देना है।
उल्लेखनीय है कि आटा मील, दाल मील, प्रोसेसिंग यूनिट, ग्रेडिंग क्लिनिंग यूनिट, आचार व पापड़ के उद्योग, दूध व खाद्य पदार्थों से संबंधित इकाइयों के लिए इस योजना में अनुदान दिया जा रहा है। प्रमुख शासन सचिव ने योजना की विस्तृृत जानकारी देते हुए बताया कि बैंकों द्वारा छोटे व मंझले खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों को अधिक से अधिक किस प्रकार लाभान्वित करवाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस योजना में नई व पुरानी खाद्य इकाइयों को स्थापित करने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा 35 प्रतिशत या अधिकतम 10 लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। इस योजना के तहत विभिन्न बैंको की ओर से खाद्य इकाई लगाने पर 90 प्रतिशत तक की ऋण सहायता दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में योजना को जन-जन तक पहुंचाने एवं आवेदकों की सहायता हेतु हेल्प लाइन नंबर 9829026990 कार्यरत है। योजना में आवेदनों की संख्या बढ़ाने की दृृष्टि से रोलिंग प्रक्रिया के द्वारा अधिक से अधिक डिस्टिक रिसोर्स पर्सन सूची बद्ध किए जा रहे हैं। सामान्य प्रक्रिया के तहत डिस्टिक रिसोर्स पर्सन के लिए आवेदन पत्र पीएमएफएमई राजस्थान पोर्टल पर उपलब्ध है।
राजस्थान राज्य कृृषि विपणन बोर्ड के जनरल मैनेजर आशु चौधरी ने बताया कि इस योजना का संचालन विपणन बोर्ड द्वारा विगत 3 वर्षों से किया जा रहा है, जिसमें भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा सम्मिलित रूप से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने के लिए अनुदान दिया जा रहा है। इसके लिए राज्य में एक प्रबंध यूनिट का संचालन भी किया जा रहा है। यह यूनिट इकाई को मशीन, आवेदन, ब्राण्डिंग व मार्केटिंग में भी सहयोग करती है। इस योजना में आवेदन पूर्ण रूप से निःशुल्क है तथा डिस्टिक रिसोर्स पर्सन को 20 हजार रुपये की राशि का भुगतान भी राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा किया जाता है।