राजस्थान चुनाव से एक बड़ा ही अजीब इत्तेफाक जुड़ा हुआ है। अगर हम साल 2013 और 2018 के चुनावों के साथ 2023 में होने वाले चुनाव पर नजर डालें तो इस बार भी राजस्थान की सभी 200 सीटों पर मतदान नहीं होगा। सिर्फ 199 सीटों पर मतदान होगा। इसकी वजह है कि मतदान से पहले किसी एक सीट पर किसी एक पार्टी के उम्मीदवार का देहांत हो जाता है और सभी सीटों पर चुनाव आयोग की पहले से तय तारीख पर मतदान नहीं हो पाता है। इस बार भी राजस्थान में एक उम्मीदवार के निधन की वजह से एक सीट पर 25 नवंबर को मतदान नहीं होगा।
राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के करणपुर से विधायक और कांग्रेस उम्मीदवार गुरमीत सिंह कुन्नर का दिल्ली एम्स में इलाज के दौरान बुधवार को निधन हो गया। वह 75 साल के थे। कुन्नर जो करणपुर से मौजूदा विधायक थे, उनको 12 नवंबर को दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के जेरिएट्रिक मेडिसिन वार्ड में भर्ती कराया गया था। कूनर की सेप्टिक शॉक और गुर्दे की बीमारी के साथ सेप्सिस से मौत हो गई। अस्पताल द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र के अनुसार, वह हाई ब्लड प्रेशर से भी पीड़ित थे। 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा के लिए मतदान 25 नवंबर को होना है।
कांग्रेस उम्मीदवार गुरमीत कुन्नर के निधन के बाद अब राजस्थान में 25 नवंबर को 199 सीटों पर ही मतदान होगा। यह पहली बार नहीं है, इससे पहले साल 2018 और 2013 में भी 199 सीट पर ही मतदान हुआ था। साल 2018 में विधानसभा चुनाव से रामगढ़ के बीएसपी प्रत्याशी लक्ष्मण का निधन हुआ था। इसके बाद पहले से तय तारीख पर चुनाव नहीं हुआ था। इसी तरह से साल 2013 में चूरू से बसपा प्रत्याशी जगदीश मेघवाल का निधन हुआ था।
अब चुनाव आयोग फैसला लेगा, हालांकि सात दिन का समय देकर कांग्रेस से प्रत्याशी का नाम लेने का भी विकल्प है। नाम लेकर सारे विधानसभा क्षेत्र के साथ ही करणपुर में भी मतदान का विकल्प है। चुनाव आयोग आज से मतदान के दिन तक और मतदान से काउंटिंग के दिन के समय में कभी भी करणपुर विधानसभा सीट पर मतदान करवा सकता है। सभी विकल्पों पर विचार करके ही चुनाव आयोग फैसला लेगा।
बेटे ने कहा- पिता अपनी सांसरिक यात्रा पूरी कर हमें छोड़ गए
देश की राजधानी दिल्ली में इलाज के दौरान गुरमीत सिंह की मौत हो गई है। इसकी जानकारी उनके बेटे रूबी ने अपने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए कहा है कि मेरे पिता गुरमीत सिंह कुन्नर अपनी सांसारिक यात्रा पूरी करते हुए हमारे बीच नहीं रहे। यह पोस्ट करने के बाद लोग लगातार इस पोस्ट को शेयर कर रहे हैं।
निर्दलीय चुनाव लड़कर विधायक बने थे गुरमीत सिंह
आपको बता दें कि इन्होंने 2018 में निर्दलीय चुनाव लड़ा था। लेकिन इसके बाद वह कांग्रेस पार्टी के समर्थन में आ गए। इसका ही नतीजा निकला कि इस बार कांग्रेस पार्टी ने उन्हें इसी विधानसभा से अपना प्रत्याशी घोषित किया। बीते करीब 4 से 5 दिन पहले ब्रेन हेमरेज होने के चलते उन्हें दिल्ली में इलाज के लिए ले जाया गया, जहां आज उन्होंने अंतिम सांस ली।
राजस्थान विधानसभा में रहा है ये इतिहास
आज उनके पार्थिव शरीर को गांव लाया जाएगा और हो सकता है कि आज ही उसका अंतिम संस्कार किया जाए। आपको बता दें कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव का इतिहास रहा है कि यहां कभी भी 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव नहीं हुए हैं। 2018 के चुनाव में बसपा के रामगढ़ प्रत्याशी और 2013 में चूरू के रामगढ़ प्रत्याशी की भी मौत हो गई थी।