राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के निदेशक ने जयपुर के रामप्रसाद मीणा आत्महत्या मामले को गंभीरता से लेते हुए खुद इसकी जांच और इन्वेस्टिगेशन करने का फैसला लिया है। साथ ही राजस्थान की मुख्य सचिव उषा शर्मा, डीजीपी उमेश मिश्रा, जयपुर पुलिस कमिश्नर आनंद कुमार श्रीवास्तव, जयपुर जिला कलेक्टर, मजिस्ट्रेट प्रकाश राजपुरोहित और जयपुर हेरिटेज नगर निगम कमिश्नर विश्राम मीणा को नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब की है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मीडिया में छपी खबर पर स्व प्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए तीन दिन में इन सभी अफसरों से मामले पर रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने मामले से जुड़े फैक्ट्स, सूचनाएं और आरोपों सहित मामले पर अब तक लिए गए एक्शन की जानकारी मांगी है। राष्ट्रीय अनूसूचित जनजाति आयोग निदेशक ने नोटिस में लिखा है कि आयोग को जो प्रेस क्लिपिंग प्राप्त हुई है, उसके आधार पर इस मामले में स्व प्रेरित प्रसंज्ञान लिया है और यह फैसला किया है कि इस मामले में इन्वेस्टिगेशन और जांच की जाए। भारतीय संविधान के आर्टिकल 338 ए के तहत आयोग को इसकी पावर है।
नोटिस मिलने के तीन दिन में आयोग को फैक्ट्स और आरोपों सहित मामले पर लिए गए एक्शन की सूचना भिजवाई जाए। एक्शन, गिरफ्तारी, IPC और SC-ST एक्ट में फाइल चार्जशीट, आर्थिक सहायता और पुनर्वास पैकेज की जानकारी मांगी। आयोग ने यह भी कहा है कि रिपोर्ट में आरोपियों के खिलाफ एक्शन, गिरफ्तारी, आईपीसी और एससी-एसटी एक्ट 1989 के प्रावधानों के तहत फाइल चार्जशीट, पीड़ित परिवार को एट्रोसिटी अमेंडमेंट रूल्स 2016 के तहत आर्थिक सहायता और पुनर्वास पैकेज आदि की जानकारी भी दी जाए।
नोटिस का जवाब नहीं दिया, तो कमीशन में व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा...
आयोग ने साफतौर पर चेतावनी देते हुए नोटिस में लिखा है कि यदि आपकी ओर से आयोग को नोटिस का जवाब दिए गए समय पर प्राप्त नहीं हुआ, तो आयोग अपनी सिविल कोर्ट की शक्तियां इस्तेमाल कर सकता है, जो कि उसे भारत के संविधान के आर्टिकल 338 ए के तहत प्राप्त हैं। साथ ही कमीशन के समक्ष आपको व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया जा सकता है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के निदेशक मिरांडा इंदुडम ने यह नोटिस जारी किया है।