जन्माष्टमी पर सजीव झांकी का चित्रण।
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कृष्ण जन्माष्टमी पर आबूरोड के शांतिवन परिसर के गेट नंबर एक के पास 75 फीट लंबे पांडाल में लगाई गई श्रीकृष्ण की सजीव झांकी ने हर किसी का मन मोह लिया। इसमें श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर बाल्यरूप, युवा रूप, मधुरा और राज दरबार को बहुत ही कलात्मक और सुंदर तरीके से दिखाया गया। झांकी देखने के लिए देर रात तक लोगों का तांता लगा रहा।
झांकी का उद्घाटन करते हुए मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने कहा कि 16 कला संपूर्ण, संपूर्ण निर्विकारी श्रीकृष्ण का जीवन सर्वगुणों, विशेषताओं और कलाओं से परिपूर्ण था। आपका जीवन सिखाता है कि जीवन को उत्सव के रूप में लें और हर एक परिस्थिति में सदा खुशमय रहें। प्रेम से रहें, प्रेम ही दुनिया का सार है।
संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी मुन्नी दीदी ने कहा कि आज सारे विश्व में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जा रही है। हर माता की इच्छा होती है कि मेरा बेटा श्रीकृष्ण की तरह गुणवान हो, सुंदर हो, प्रतिभा संपन्न और यशस्वी हो। उसके लिए जरूरी है कि माताओं को भी यशोदा माता की तरह दिव्य संस्कार देने होंगे। इस मौके पर कार्यकारी सचिव डॉ. बीके मृत्युंजय भाई, महिला प्रभाग की बीके चक्रधारी दीदी, बीके प्रकाश भाई, बीके देव भाई सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
पांच झांकियों में दिखाया श्रीकृष्ण का जीवन चरित्र
झांकी में कुल पांच अलग-अलग झांकी सजाईं गई हैं। पहली झांकी में कंसपुरी को दिखाया गया है। जिसमें चरित्र, लाइट-साउंड के माध्यम से अभिनय करते हुए प्रदर्शित किए गए हैं। दूसरे में वृंदावन, वरसाने का दृश्य दर्शाया गया है। तीसरे में श्रीकृष्ण को पीपल के पत्ते पर जन्म की झांकी दिखाई गई है। चौथे में बाल रूप और पांचवें में राज सिंहासन, राज दरबार, कल का स्वर्णिम भारत की झांकी सजाई गई है। बैकग्राउंड में चलती म्यूजिक और कामेंट्री लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रही।